100 रुपए किलो के इमली बीज को 'चमत्कारी सिद्ध बीज' बना देता था बाबा अशोक खरात.
-डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
महाराष्ट्र की एपस्टीन फाइल कांड के सूत्रधार बाबा अशोक खरात से एसआईटी पुलिस ने 7 घंटे प्रेमपूर्वक पूछताछ की। इसके बाद उसे सहारा देकर कालकोठरी में डाला गया क्योंकि वह खुद चलने लायक नहीं बचा था।
उसका ओश्नो जल का भंडार कोई काम नहीं आया।
उसकी भक्तिन रहीं महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की तरफ से सफाई आई है कि बाबा के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो आयोग की अध्यक्ष बनने के पहले के हैं। उन्हें बाबा ने पद दिलवाया था, यह सवाल अब भी है।
रुद्राक्ष वाले से भी श्याणा निकला खरात :
100 रुपये किलो के बीज को बाबा ने बना देता था 'चमत्कारी सिद्ध बीज'!! अशोक खरात बाजार से साधारण इमली के बीज खरीदता था -100 रुपये किलो!
फिर स्टाफ से पॉलिश करवाता, चमकाता , पूजा-पाठ का ड्रामा रचता ... और भक्तों को बोलता – “ये बीज भगवान कृष्ण ने खुद आशीर्वाद में दिया है! घर में रखो तो सारी परेशानियाँ, ग्रह दोष, दुश्मन सब भाग जाएंगे!”
नतीजा? ये वही एक-एक बीज बिक जाते से 1 लाख रुपये तक में! कहता अभिमंत्रित है! जैसे रुद्राक्ष होता है !!
मूर्ख भक्त लोग रुपये देते और सोचते – असली आशीर्वाद मिल गया!”
नकली सांप का खेल
रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नकली प्लास्टिक सांप पूजा के बीच अचानक हिलते... लोग डर के मारे चीखते!
बाघ की खाल, जंगली जानवरों के नकली सामान – पूरा तांत्रिक सीन सेट!
डर का माहौल बनाकर खुद को 'महान रक्षक' बताता और फिर लाखों रुपये चढ़ावा ऐंठ लेता ।
महिलाओं के साथ तो खेल और भी खतरनाक...
पहले भरोसा जीतते, फिर नशे की दवा या हिप्नोसिस... गुप्त कैमरे से वीडियो बनाते और ब्लैकमेल!
अब तक 58 अश्लील वीडियो पेन ड्राइव में मिल चुके हैं। पुलिस कह रही है - बाबा पहले पीड़ित की आर्थिक स्थिति देखता था, फिर उसी स्टेंडर्ड से उल्लू बनाता।
सौ से ज्यादा विदेश यात्राएँ...150 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति... सब कुछ अंधविश्वास की आड़ में!
6 शिकायतें आ चुकीं अब तक एसआईटी के पास और रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं।
सोचिये संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम के इलाके में ये सब हुआ।
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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
उसकी भक्तिन रहीं महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की तरफ से सफाई आई है कि बाबा के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो आयोग की अध्यक्ष बनने के पहले के हैं। उन्हें बाबा ने पद दिलवाया था, यह सवाल अब भी है।