HB TV News is a trusted digital news platform delivering the latest updates from India and around the world. We cover breaking news, politics, business, technology, entertainment, sports, and more with accuracy and speed. Our mission is to provide reliable, unbiased, and timely information to our readers.
पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो डिलीट करने के मामले पर संसदीय समिति ने कड़ा रुख दिखाया है। संसदीय मामलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर आज हुई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय प्रतिनिधियों के कड़े सवालों का सामना करना पड़। संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि इस मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की बुरी तरह हार हुई है और कांग्रेस ने यहां कब्जा बरकरार रखा है। अब लोग भले ही कह रहे हों कि दद्दा यानी की पिछली विधानसभा में कांग्रेस से हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण भाजपा का यह हाल हुआ है, लेकिन इसके कारण अनेक हैं।
जरा सोचिए कि आखिर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले नरोत्तम मिश्रा चुनाव कैसे हार गए? और जब हार गए तो उसके बाद दतिया की जनता के लिए क्या किया?
यह तो सबको पता है कि दद्दा का टिकट दिल्ली से कटा था और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति थी। टिकट कटने का कारणों में दद्दा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, लोगों से खराब व्यवहार और सीएम की सवारी जैसे कई कारण शामिल हैं। जब बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा यानी उपचुनाव की नौबत आ गई, तब दद्दा फिर से ताल ठोंकने लगे।
इधर, पार्टी ने मन बना लिया था कि इस बार दद्दा तो नहीं ही चलेंगे। दूसरी तरफ दद्दा खुद को भाजपा उम्मीदवार मानकर चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे, जब टिकट कटा तो दद्दा के साथ ही समर्थकों ने भी आंखें तरेरी। दद्दा ने भी कोशिश की, लेकिन जब लग गया कि कुछ होने वाला नहीं है तो फिर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतर गए।
फिर भी दद्दा दिल से यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। तभी तो आशुतोष तिवारी के नामांकन में उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। लोग इसे दद्दा समर्थकों के लिए संदेश भी मानते हैं। बाहर से दद्दा भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक आक्रोश की एक चिंगारी भी भड़क रही थी कि इस बार पार्टी आलाकमान को सबक सीखा ही देनी है।
दतिया की इस हार से एमपी के दद्दा जैसे उन नेताओं की बांछें जरूर खिली होंगी, जिनसे पार्टी किनारा करना चाहती है। लेकिन, इससे पहले यह समझना होगा कि दतिया में हार की एकमात्र वजह दद्दा को टिकट देना नहीं है। दतिया दद्दा की थी ही नहीं। वो तो कांग्रेस के पास थी और कांग्रेस के पास रहने के दौरान दद्दा ने उस सीट को भाजपा का बनाने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा गड्ढा ही खोदते रहे।
ऐसे में दद्दा जैसे नेताओं के आंख तरेरने से कम से कम मध्यप्रदेश में भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि ऐसे नेताओं के कारण ही कई विधानसभा क्षेत्रों में लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ता अब हताश हो रहे हैं।
भाजपा को तो ऐसे सभी नेताओं को अब मार्गदर्शक मंडल में ही बिठा देना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। इससे जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी संतुष्ट होंगे।
खैर, भाजपा इस हार की समीक्षा में जुट गई होगी। प्रदेश अध्यक्ष ने खेल बिगाड़ने वालों के खिलाफ एक्शन का भी ऐलान कर दिया है। जाहिर है कुछ ऐसा होगा, जो आगे के लिए दद्दा टाइप नेताओं के लिए सबक साबित होगा।
कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने भाजपा का घमंड तोड़ दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को करारी शिकस्त दी है।
बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक बातचीत की नई संभावना सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत सोमवार, 3 अगस्त से शुरू होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत का संबंध जारी युद्ध को समाप्त करने और Strait of Hormuz सहित महत्वपूर्ण मुद्दों से है।
देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार सोमवार को दिल्ली-NCR, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के कारण जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा भी जताया गया है।
पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो डिलीट करने के मामले पर संसदीय समिति ने कड़ा रुख दिखाया है। संसदीय मामलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर आज हुई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय प्रतिनिधियों के कड़े सवालों का सामना करना पड़। संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि इस मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की बुरी तरह हार हुई है और कांग्रेस ने यहां कब्जा बरकरार रखा है। अब लोग भले ही कह रहे हों कि दद्दा यानी की पिछली विधानसभा में कांग्रेस से हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण भाजपा का यह हाल हुआ है, लेकिन इसके कारण अनेक हैं।
जरा सोचिए कि आखिर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले नरोत्तम मिश्रा चुनाव कैसे हार गए? और जब हार गए तो उसके बाद दतिया की जनता के लिए क्या किया?
यह तो सबको पता है कि दद्दा का टिकट दिल्ली से कटा था और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति थी। टिकट कटने का कारणों में दद्दा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, लोगों से खराब व्यवहार और सीएम की सवारी जैसे कई कारण शामिल हैं। जब बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा यानी उपचुनाव की नौबत आ गई, तब दद्दा फिर से ताल ठोंकने लगे।
इधर, पार्टी ने मन बना लिया था कि इस बार दद्दा तो नहीं ही चलेंगे। दूसरी तरफ दद्दा खुद को भाजपा उम्मीदवार मानकर चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे, जब टिकट कटा तो दद्दा के साथ ही समर्थकों ने भी आंखें तरेरी। दद्दा ने भी कोशिश की, लेकिन जब लग गया कि कुछ होने वाला नहीं है तो फिर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतर गए।
फिर भी दद्दा दिल से यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। तभी तो आशुतोष तिवारी के नामांकन में उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। लोग इसे दद्दा समर्थकों के लिए संदेश भी मानते हैं। बाहर से दद्दा भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक आक्रोश की एक चिंगारी भी भड़क रही थी कि इस बार पार्टी आलाकमान को सबक सीखा ही देनी है।
दतिया की इस हार से एमपी के दद्दा जैसे उन नेताओं की बांछें जरूर खिली होंगी, जिनसे पार्टी किनारा करना चाहती है। लेकिन, इससे पहले यह समझना होगा कि दतिया में हार की एकमात्र वजह दद्दा को टिकट देना नहीं है। दतिया दद्दा की थी ही नहीं। वो तो कांग्रेस के पास थी और कांग्रेस के पास रहने के दौरान दद्दा ने उस सीट को भाजपा का बनाने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा गड्ढा ही खोदते रहे।
ऐसे में दद्दा जैसे नेताओं के आंख तरेरने से कम से कम मध्यप्रदेश में भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि ऐसे नेताओं के कारण ही कई विधानसभा क्षेत्रों में लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ता अब हताश हो रहे हैं।
भाजपा को तो ऐसे सभी नेताओं को अब मार्गदर्शक मंडल में ही बिठा देना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। इससे जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी संतुष्ट होंगे।
खैर, भाजपा इस हार की समीक्षा में जुट गई होगी। प्रदेश अध्यक्ष ने खेल बिगाड़ने वालों के खिलाफ एक्शन का भी ऐलान कर दिया है। जाहिर है कुछ ऐसा होगा, जो आगे के लिए दद्दा टाइप नेताओं के लिए सबक साबित होगा।
कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने भाजपा का घमंड तोड़ दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को करारी शिकस्त दी है।
बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।
यह फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आधिकारिक विमान दुर्घटना वाली थीसिस को चुनौती देती है और वैकल्पिक साक्ष्यों/जांच पर आधारित है। यह फिल्म डॉक्यू-ड्रामा शैली की है और षड्यंत्र/रहस्य को उजागर करने का दावा करती है। दर्शक के सामने पूरे दो घंटे से ज्यादा की माथापच्ची के बाद भी न तो कोई रहस्य उजागर हो पाता है , न षड्यंत्र !
फिल्मी दुनिया में आज सबसे ज्यादा चर्चा ‘रामायण’ ट्रेलर की है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश अभिनीत इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का ट्रेलर 30 जुलाई को रिलीज हुआ। ट्रेलर में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण के किरदार में नजर आ रहे हैं।
सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर मंगलवार को रिलीज कर दिया गया है। आमिर खान प्रोडक्शंस की इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। ट्रेलर में भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द दिखाया गया है, जिसे देखकर आपकी आंखें नम हो सकती हैं।
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की सोशल मीडिया पोस्ट अक्सर सुर्खियों में आ जाती है। अब रविवार देर रात अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इस फिल्म का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह खुद को बहुत गंभीरता से नहीं लेती। आदिवासी, समुद्री लुटेरे , भूत, जानवर के साथ ह्यूमन चेन वाले सीन, बैलून सीक्वेंस, ऊँचाई का डर – सब हँसने का मसाला हैं। फिल्म देखकर लगता है कि दिमाग की वारंटी खत्म हो चुकी है।सर्कस जैसी है यह फिल्म, जिसमें जूने - पुराने कलाकार हंसाने के लिए जोकरों की तरह आ गए हैं, और उछल-कूद कर रहे हैं। उन बेचारों को लगता है कि यही कॉमेडी है !
चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें तीन महीने जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने भारी जुर्माना भी लगाया है।
आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टाइटन्स को 5 विकेट से हराकर लगातार दूसरी बार खिताब जीत लिया। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में विराट कोहली की 75 रनों की नाबाद पारी, भुवनेश्वर कुमार, रसिक सलाम और जोश हेज़लवुड की घातक गेंदबाजी, और रजत पाटीदार की कप्तानी ने आरसीबी को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
GT vs RR Qualifier 2 में गुजरात टाइटंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान रॉयल्स को 7 विकेट से हराकर IPL 2026 के फाइनल में जगह बना ली। कप्तान शुभमन गिल के विस्फोटक शतक और साई सुदर्शन की तेज अर्धशतकीय पारी ने गुजरात की जीत की नींव रखी। वहीं वैभव सूर्यवंशी के 96 रन भी राजस्थान को जीत नहीं दिला सके।
सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए IPL 2026 के दूसरे प्लेऑफ मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने 47 रनों से शानदार जीत दर्ज की। इस मैच में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन बनाए।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की बुरी तरह हार हुई है और कांग्रेस ने यहां कब्जा बरकरार रखा है। अब लोग भले ही कह रहे हों कि दद्दा यानी की पिछली विधानसभा में कांग्रेस से हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण भाजपा का यह हाल हुआ है, लेकिन इसके कारण अनेक हैं।
जरा सोचिए कि आखिर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले नरोत्तम मिश्रा चुनाव कैसे हार गए? और जब हार गए तो उसके बाद दतिया की जनता के लिए क्या किया?
यह तो सबको पता है कि दद्दा का टिकट दिल्ली से कटा था और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति थी। टिकट कटने का कारणों में दद्दा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, लोगों से खराब व्यवहार और सीएम की सवारी जैसे कई कारण शामिल हैं। जब बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा यानी उपचुनाव की नौबत आ गई, तब दद्दा फिर से ताल ठोंकने लगे।
इधर, पार्टी ने मन बना लिया था कि इस बार दद्दा तो नहीं ही चलेंगे। दूसरी तरफ दद्दा खुद को भाजपा उम्मीदवार मानकर चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे, जब टिकट कटा तो दद्दा के साथ ही समर्थकों ने भी आंखें तरेरी। दद्दा ने भी कोशिश की, लेकिन जब लग गया कि कुछ होने वाला नहीं है तो फिर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतर गए।
फिर भी दद्दा दिल से यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। तभी तो आशुतोष तिवारी के नामांकन में उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। लोग इसे दद्दा समर्थकों के लिए संदेश भी मानते हैं। बाहर से दद्दा भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक आक्रोश की एक चिंगारी भी भड़क रही थी कि इस बार पार्टी आलाकमान को सबक सीखा ही देनी है।
दतिया की इस हार से एमपी के दद्दा जैसे उन नेताओं की बांछें जरूर खिली होंगी, जिनसे पार्टी किनारा करना चाहती है। लेकिन, इससे पहले यह समझना होगा कि दतिया में हार की एकमात्र वजह दद्दा को टिकट देना नहीं है। दतिया दद्दा की थी ही नहीं। वो तो कांग्रेस के पास थी और कांग्रेस के पास रहने के दौरान दद्दा ने उस सीट को भाजपा का बनाने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा गड्ढा ही खोदते रहे।
ऐसे में दद्दा जैसे नेताओं के आंख तरेरने से कम से कम मध्यप्रदेश में भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि ऐसे नेताओं के कारण ही कई विधानसभा क्षेत्रों में लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ता अब हताश हो रहे हैं।
भाजपा को तो ऐसे सभी नेताओं को अब मार्गदर्शक मंडल में ही बिठा देना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। इससे जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी संतुष्ट होंगे।
खैर, भाजपा इस हार की समीक्षा में जुट गई होगी। प्रदेश अध्यक्ष ने खेल बिगाड़ने वालों के खिलाफ एक्शन का भी ऐलान कर दिया है। जाहिर है कुछ ऐसा होगा, जो आगे के लिए दद्दा टाइप नेताओं के लिए सबक साबित होगा।
बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।
मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में गुरुवार को सुप्रम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया है कि शुक्रवार की नमाज़ के लिए मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर के बिल्कुल बगल में स्थित जगह उपलब्ध कराई जाए।
मॉडल एवं एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत खारिज हो गई है। शुक्रवार को विशेष अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार की शाम को कोर्ट ने उनकी जमानत को खारिज कर दिया है।
पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो डिलीट करने के मामले पर संसदीय समिति ने कड़ा रुख दिखाया है। संसदीय मामलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर आज हुई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय प्रतिनिधियों के कड़े सवालों का सामना करना पड़। संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि इस मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की बुरी तरह हार हुई है और कांग्रेस ने यहां कब्जा बरकरार रखा है। अब लोग भले ही कह रहे हों कि दद्दा यानी की पिछली विधानसभा में कांग्रेस से हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण भाजपा का यह हाल हुआ है, लेकिन इसके कारण अनेक हैं।
जरा सोचिए कि आखिर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले नरोत्तम मिश्रा चुनाव कैसे हार गए? और जब हार गए तो उसके बाद दतिया की जनता के लिए क्या किया?
यह तो सबको पता है कि दद्दा का टिकट दिल्ली से कटा था और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति थी। टिकट कटने का कारणों में दद्दा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, लोगों से खराब व्यवहार और सीएम की सवारी जैसे कई कारण शामिल हैं। जब बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा यानी उपचुनाव की नौबत आ गई, तब दद्दा फिर से ताल ठोंकने लगे।
इधर, पार्टी ने मन बना लिया था कि इस बार दद्दा तो नहीं ही चलेंगे। दूसरी तरफ दद्दा खुद को भाजपा उम्मीदवार मानकर चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे, जब टिकट कटा तो दद्दा के साथ ही समर्थकों ने भी आंखें तरेरी। दद्दा ने भी कोशिश की, लेकिन जब लग गया कि कुछ होने वाला नहीं है तो फिर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतर गए।
फिर भी दद्दा दिल से यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। तभी तो आशुतोष तिवारी के नामांकन में उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। लोग इसे दद्दा समर्थकों के लिए संदेश भी मानते हैं। बाहर से दद्दा भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक आक्रोश की एक चिंगारी भी भड़क रही थी कि इस बार पार्टी आलाकमान को सबक सीखा ही देनी है।
दतिया की इस हार से एमपी के दद्दा जैसे उन नेताओं की बांछें जरूर खिली होंगी, जिनसे पार्टी किनारा करना चाहती है। लेकिन, इससे पहले यह समझना होगा कि दतिया में हार की एकमात्र वजह दद्दा को टिकट देना नहीं है। दतिया दद्दा की थी ही नहीं। वो तो कांग्रेस के पास थी और कांग्रेस के पास रहने के दौरान दद्दा ने उस सीट को भाजपा का बनाने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा गड्ढा ही खोदते रहे।
ऐसे में दद्दा जैसे नेताओं के आंख तरेरने से कम से कम मध्यप्रदेश में भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि ऐसे नेताओं के कारण ही कई विधानसभा क्षेत्रों में लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ता अब हताश हो रहे हैं।
भाजपा को तो ऐसे सभी नेताओं को अब मार्गदर्शक मंडल में ही बिठा देना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। इससे जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी संतुष्ट होंगे।
खैर, भाजपा इस हार की समीक्षा में जुट गई होगी। प्रदेश अध्यक्ष ने खेल बिगाड़ने वालों के खिलाफ एक्शन का भी ऐलान कर दिया है। जाहिर है कुछ ऐसा होगा, जो आगे के लिए दद्दा टाइप नेताओं के लिए सबक साबित होगा।
कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने भाजपा का घमंड तोड़ दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को करारी शिकस्त दी है।
बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।
नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है- देखना होगा कि कितने एफआईआर हैं। उनमें से कितने ऐसे लोगों पर है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके की अमेरिका में हुई पढ़ाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने उनके पिता की आय और पढ़ाई के खर्च को लेकर महाराष्ट्र सरकार से शिकायत की थी। इसका जवाब देते हुए दीपके ने अपने दाखिले और छात्रवृत्ति के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किए। उन्होंने बताया कि अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में उनकी पढ़ाई स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए हुई है
दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार को महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। इसके बाद विनेश फोगाट की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है और यह लड़ाई जारी रहेगी।
कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु में किसानों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है। तिरुचिरापल्ली में किसानों ने सिंचाई के लिए कावेरी का पानी तत्काल छोड़ने की मांग को लेकर रेत में खुद को दबाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण कुरुवई फसल पर संकट मंडरा रहा है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) प्रमुख और पूर्व बीजेपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह तथा पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया है। यह फैसला इस लंबे समय से चल रहे हाई-प्रोफाइल मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
टीम इंडिया को श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। बुमराह की जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आक़िब नबी (Auqib Nabi) को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। यह आक़िब नबी का भारतीय सीनियर टीम के साथ पहला कॉल-अप है।
Puri Jagannath Temple में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के नवयौवन दर्शन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या के कारण धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई भक्त घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।