सिर्फ नाम ‘पर्वत’ सा होने से कुछ नहीं होता…दिल ‘मोहन’ सा होना चाहिए.
सीएम डॉ.मोहन यादव अपने सरल व्यवहार और व्यक्तित्व से हमेशा लोगों को आकर्षित करते रहते हैं। यही वजह है कि जनता भी उनको अपने बीच का महसूस करती है। एक बार फिर सीएम डॉ.मोहन यादव अपने व्यवहार से राजनीति में ही नहीं आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गए हैं।
अपने एक बड़बोले मंत्री को बचाने के लिए बिना किसी गलती के भरी विधानसभा में जब सीएम ने माफी मांगी, तो सब हैरान रह गए। लोग कह रहे हैं कि सीएम ने उस व्यक्ति के लिए माफी मांगी जो उनकी राह में हमेशा कांटे ही बोता आया है। शायद सीएम भी इससे अनजान नहीं हैं और न ही भाजपा नेता या जनता।
जब विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की बात कर दी, तब जमकर बवाल मचा। कैलाशजी की तो ऐसी बयानबाजी की आदत है। उन्हें लगा कि सारे मंत्री और भाजपा नेता उनकी तारीफ करेंगे, तालियां बजाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और सिंघार ने भी विजयवर्गीय को जुबान संभालने का कह दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस स्थिति को भांप गए और उन्होंने समझाइश देते हुए इस पर आपत्ति ली।
सीएम डॉ.यादव यह समझ चुके थे कि कैलाशजी ने विपक्ष को बैठे-ठाले एक मुद्दा दे दिया है। हालांकि बवाल बढ़ने के बाद इस पर मंत्रीजी का बयान भी आया, लेकिन उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर के कहने के बाद भी सिर्फ दुख व्यक्त किया, खेद नहीं। सीएम को यह भान हो गया था कि यह मामला इतनी जल्दी शांत नहीं होने वाला। ऐसे में बजट सत्र में व्यवधान के साथ ही भाजपा की भी बदनामी हो रही थी। जब सीएम ने देखा कि मामला और बिगड़ता जा रहा है तो उन्होंने बड़ी ही सहजता से माफी मांग ली, जबकि इस पूरे प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
हालांकि सीएम के माफी मांगने को भी मंत्रीजी ने अपने ही नजरिए से देखा। जब पत्रकारों ने सीएम के माफी मांगने पर मंत्रीजी से सवाल किए तो उनका जवाब था-कप्तान हैं वो यार, मांफी मांगे तो क्या हो गया।
इससे साफ जाहिर है कि मंत्रीजी, सीएम की जगह होते तो वे कदापि ऐसा नहीं करते, उल्टे और आग भड़काने की कोशिश में जुट जाते…
लोग तो यह भी कह रहे हैं-सिर्फ नाम ‘पर्वत’ सा होने से कुछ नहीं होता दिल ‘मोहन’ सा होना चाहिए…