सिलिंग की जमीन को गलत तरीके से प्राइवेट पार्टी को देने वाले एसडीएम सोनी अब लीपापोती में जुटे, सोशल मीडिया पर चलवा रहे गलत खबर, जांच हो तो खुल जाए सारी पोल.
इंदौर। इंदौर के निपानिया में सीलिंग की जमीन को एक प्राइवेट पार्टी को सौंपने वाले जूनी इंदौर एसडीएम प्रदीप सोनी अब इस मामले की लीपापोती में जुट गए हैं। वे खुद को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर यह खबरें चला रहे हैं कि वे बिल्कुल पाक-साफ हैं। अगर इस मामले की जांच हो जाए तो पता चलेगा कि किस तरह एसडीएम सोनी ने सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया है।
उल्लेखनीय है कि एचबीटीवी न्यूज ने आज शुक्रवार 20 फरवरी को यह मामला उजागर किया था। इसमें बताया गया था कि किस तरह एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने कलेक्टर के आदेश के विपरित प्रकरण क्रमांक 0222/अ 6 अ/2024-25 में ग्राम निपनिया की भूमि सर्वे नंबर 279/1/1/1 व 279/1/2/3 को शासन में अधिग्रहित करने का प्रस्ताव न भेजते हुए आवेदक मेसर्स कैच रियलिटी तरफे संजय पिता चंद्रगोपाल लड्डा के आवेदन पर उक्त भूमि के नक्शा संशोधन का आदेश जारी कर दिया। इसी जमीन पर चंद्र लीला होटल व गार्डन बना हुआ है।
सोनी ने की लीपापोती की कोशिश
एचबीटीवी न्यूज द्वारा यह मामला उजागर करने के बाद एसडीएम प्रदीप सोनी ने इस पर लीपापोती की कोशिश शुरू की। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस खबर को भ्रामक बताने की कोशिश की। सोनी के स्पष्टीकरण में कहा गया कि आवेदक केच रियलिटी प्रालि के द्वारा ग्राम निपानिया की भूमि सर्वे नम्बर 274/5 ऑनलाईन नक्शे में गलत अंकित होने से नक्शे में सर्वे नम्बर 274/5 के स्थान पर 279/1/1/1,279/1/2/3 दर्ज किए जाने हेतु अनुविभागीय अधिकारी जूनी इंदौर न्यायालय में धारा, 115-116 (अभिलेख दुरूस्ती) के तहत आवेदन पेश किया गया। ग्राम निपानिया स्थित उक्त भूमि ना तो शहरी सीलिंग से प्राप्त एवं शासन में वैष्ठित / कब्जा प्राप्त भूमियों की सूची में शामिल है और, ना ही कलेक्टर इंदौर के आदेश दिनांक 04/11/2022 की सूची में शामिल है। शासकीय अभिलेख अनुसार उक्त भूमि सर्वे नम्बर 279/1/1/1, 279/1/2/3, कभी भी शासकीय सीलिंग की नही रही है। एवं निजी व्यक्तियों के नाम पर ही दर्ज है।
सोनी के अनुसार यह सीलिंग की जमीन नहीं
सोशल मीडिया पर चलाई गई खबरों के अनुसार उक्त भूमि ना तो सीलिंग की है और ना ही कलेक्टर ने इसे कभी भी शासन में अधिग्रहित करने का आदेश दिया था। बल्कि कलेक्टर इंदौर के द्वारा जारी आदेश दिनांक 04/11/2022 को नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 19 (5) एवं 20 (क) के तहत यह आदेश जारी किया था कि, नगर निगम (कालोनी सेल), टी.एन.सी.पी. जिला पंजीयक, एवं अन्य विभाग कलेक्टर से अनापत्ति प्राप्त किये जाने के पश्चात् ही कोई विभागीय स्वीकृति प्रदान करेंगे। एवं संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, उपरोक्त भूमियों के संबंध में नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 19 (5) एवं 20 (क) की शर्तों का उल्लघंन पाए जाने पर हितबद्ध पक्षकारों की विधिवत सुनवाई कर गुणदोष के आधार पर भूमि को शासन में वैष्ठित करने के सबंध में प्रस्ताव अनुशंसा सहित प्रस्तुत करेगें। उक्त सर्वे नम्बर 279/1/1/1 व 279/1/2/3 कलेक्टर इंदौर आदेश दिनांक 04/11/2022 में नही है।
अब जरा समझ लें कलेक्टर का आदेश
कार्यालय कलेक्टर जिला इंदौर के आदेश क्रमांक 1882/अ क री/2022 दिनांक 4/11/2022 में संलग्न सूची में क्रमांक 88 पर ग्राम निपनिया तहसील जूनी इंदौर की भूमि खसरा क्रमांक 279/1/1 की भूमि को सीलिंग के प्रकरण क्रमांक 4/अ 90/सी 1/ 19 (5)/ 1995-96 अनुसार गुलमोहर गृह निर्माण सह संस्था की उक्त भूमि को कलेक्टर महोदय के आदेश के पेरा 6 में लिखा था कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) उपरोक्त भूमि के संबंध में भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 19(5) एवं 20 ( क) की शर्तों अनुसार भूमि को शासन में अधिग्रहीत करने के संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इसके बावजूद एसडीएम प्रदीप सोनी द्वारा प्रकरण क्रमांक 0222/अ 6 अ/2024-25 में ग्राम निपनिया की भूमि सर्वे नंबर 279/1/1/1 व 279/1/2/3 की भूमि को शासन में अधिग्रहित करने का प्रस्ताव न भेजते हुए आवेदक मेसर्स कैच रियलिटी तर्फे संजय पिता चंद्रगोपाल लड्ढा निजी व्यक्ति के आवेदन पर उक्त भूमि का नक्शा संशोधन का आदेश जारी कर दिया। एक बार आदेश में त्रुटि हुई तो दोबारा 28 मार्च 25 को नया आदेश जारी कर दिया।
कलेक्टर के आदेश में दर्ज है यह जमीन
एसडीएम सोनी यह खबर फैला रहे हैं कि यह जमीन कलेक्टर के आदेश में दर्ज नहीं है, जबकि सर्वे नंबर 279/1/1 जो कलेक्टर महोदय के आदेश में दर्ज हे। राजस्व रिकार्ड अनुसार उसी के विक्रय पश्चात बटे नंबर 279/1/1/1 और 279/1/2/3 हैं यानी कलेक्टर महोदय के आदेश में जो भूमि अंकित है वो ही भूमि का नक्शा संशोधन किया गया है। कलेक्टर महोदय के आदेश के पृष्ठ 2 के पेरा 2 में स्पष्ट लिखा है कि ये भूमि शहरी सीलिंग प्रभावित होकर अतिशेष भूमि रही है। कलेक्टर महोदय के आदेश के पृष्ठ क्रमांक 2 के पेरा 3 को भी पढ़ें। इसमें स्पष्ट लिखा है कि उक्त सूची में ऐसी विमुक्ति प्राप्त सीलिंग प्रभावित भूमि को उल्लेखित किया गया है, जो नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 के अंतर्गत शहरी सीलिंग प्रभावित भूमि होकर अतिशेष भूमि रही है, जिसके संबंध में भूमि स्वामी तथा संस्था ने गरीब व आवासहीन संस्था सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिखित आश्वासन पर धारा 20 (क) के अंतर्गत शासन से शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अध्याधीन छूट प्राप्त की गई है। यदि उपरोक्त विमुक्ति प्राप्त भूमि धारा 20 'क' के अन्तर्गत विमुक्त नहीं की जाती तो शासन में वेष्ठित होकर सीलिंग एक्ट की मंषा अनुसार शासकीय भूमि होकर व्यापक लोक हित में प्रयुक्त होती।