लोकसभा में शशि थरूर की बड़ी पहल: वैवाहिक बलात्कार अपराध बनाने सहित तीन महत्वपूर्ण निजी विधेयक पेश.
लोकसभा में शशि थरूर की बड़ी पहल: वैवाहिक बलात्कार अपराध बनाने सहित तीन महत्वपूर्ण निजी विधेयक पेश
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में तीन निजी विधेयक (Private Member Bills) पेश किए हैं, जिनमें सबसे चर्चित प्रस्ताव वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने वाला बिल है। थरूर ने कहा कि “शादी के बाद भी व्यक्ति को अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार होता है, और कानून को इसे मान्यता देनी चाहिए।

वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने का प्रस्ताव
- थरूर ने कहा कि ना का मतलब ना विवाह के भीतर भी उतना ही लागू होता है।
- उन्होंने बीएनएस में संशोधन का निजी विधेयक पेश किया।
- सांसद के मुताबिक, मैरिटल रेप शादी की परिभाषा नहीं, बल्कि हिंसा का मामला है। अब कार्रवाई का समय है।
- उनका मानना है कि हर महिला को विवाह संबंध में भी शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा का मौलिक अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरा बिल: राज्यों के पुनर्गठन के लिए स्थायी आयोग
इस बिल का उद्देश्य है कि—
- भविष्य में नए राज्यों के गठन या सीमाओं के बदलाव का निर्णय
- डेटा, जनगणना, आर्थिक व्यवहार्यता, राष्ट्रीय एकता और जनता की राय
के आधार पर ही किया जाए।
थरूर के अनुसार, यह प्रक्रिया देश को अधिक संगठित और संवैधानिक रूप से मजबूत बनाएगी।
तीसरा बिल: 'राइट टू डिस्कनेक्ट' — कर्मचारियों को अधिकार
शशि थरूर ने कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तीसरा गैर-सरकारी विधेयक पेश किया, जिसमें—
- कार्य के बाद नौकरी से जुड़े ईमेल, कॉल या संदेशों से डिस्कनेक्ट रहने का अधिकार
- काम के घंटों की कानूनी सीमा
- कार्य-जीवन संतुलन पर जोर
थरूर ने आंकड़े साझा करते हुए कहा:
- भारत की 51% आबादी हफ्ते में 49 घंटे से अधिक काम करती है
- 78% लोग बर्नआउट का सामना कर रहे हैं इसलिए कर्मचारियों की भलाई के लिए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ कानून की जरूरत है।
लोकसभा में शशि थरूर की बड़ी पहल: वैवाहिक बलात्कार अपराध बनाने सहित तीन महत्वपूर्ण निजी विधेयक पेश
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में तीन निजी विधेयक (Private Member Bills) पेश किए हैं, जिनमें सबसे चर्चित प्रस्ताव वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने वाला बिल है। थरूर ने कहा कि “शादी के बाद भी व्यक्ति को अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार होता है, और कानून को इसे मान्यता देनी चाहिए।
वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने का प्रस्ताव
थरूर ने कहा कि ना का मतलब ना विवाह के भीतर भी उतना ही लागू होता है।
उन्होंने बीएनएस में संशोधन का निजी विधेयक पेश किया।
सांसद के मुताबिक, मैरिटल रेप शादी की परिभाषा नहीं, बल्कि हिंसा का मामला है। अब कार्रवाई का समय है।
उनका मानना है कि हर महिला को विवाह संबंध में भी शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा का मौलिक अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरा बिल: राज्यों के पुनर्गठन के लिए स्थायी आयोग
इस बिल का उद्देश्य है कि—
भविष्य में नए राज्यों के गठन या सीमाओं के बदलाव का निर्णय
डेटा, जनगणना, आर्थिक व्यवहार्यता, राष्ट्रीय एकता और जनता की राय
के आधार पर ही किया जाए।
थरूर के अनुसार, यह प्रक्रिया देश को अधिक संगठित और संवैधानिक रूप से मजबूत बनाएगी।
तीसरा बिल: 'राइट टू डिस्कनेक्ट' — कर्मचारियों को अधिकार
शशि थरूर ने कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तीसरा गैर-सरकारी विधेयक पेश किया, जिसमें—
कार्य के बाद नौकरी से जुड़े ईमेल, कॉल या संदेशों से डिस्कनेक्ट रहने का अधिकार
काम के घंटों की कानूनी सीमा
कार्य-जीवन संतुलन पर जोर
थरूर ने आंकड़े साझा करते हुए कहा:
भारत की 51% आबादी हफ्ते में 49 घंटे से अधिक काम करती है
78% लोग बर्नआउट का सामना कर रहे हैं इसलिए कर्मचारियों की भलाई के लिए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ कानून की जरूरत है।