राज्यसभा में दिग्विजय सिंह के भाषण के मायने, आखिर ‘न मैं टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं’ कहकर क्या दिया संदेश?.
नई दिल्ली। बुधवार को राज्यसभा से कई सदस्यों को विदाई दी गई। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़के तक ने विदाई भाषण दिया। सबसे अधिक चर्चा मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भाषण की हो रही है। उन्होंने कहा कि न मैं टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं। मध्यप्रदेश और कांग्रेस के सियासी गलियारे में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह ने कुछ महीने पहले ही कहा था कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते, इसलिए यह सीट खाली कर रहे हैं। उस समय भी यह चर्चा आम थी कि उनकी कांग्रेस आलाकमान से नहीं बन रही और हो सकता है कि पार्टी उन्हें तीसरा मौका नहीं दे। शायद यही वजह है कि उन्होंने पहले ही इस चुनाव से खुद को अलग कर दिया। आज राज्यसभा में उन्होंने जो विदाई भाषण दिया, उससे उनके मन में उठी कसक का अंदाजा लगाया जा रहा है।
अपने राजनीतिक जीवन को याद किया
दिग्विजय सिंह ने कहा कि छात्र जीवन में मेरा राजनीति से कोई संपर्क और संबंध नहीं था। कुछ परिस्थितियां इस प्रकार की बनीं कि मैं 22 साल की उम्र में सर्वसम्मति से नगर पालिका अध्यक्ष बन गया। 30 साल की उम्र में विधायक और 33 साल की उम्र में मंत्री बन गया, सांसद बन गया और 46 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बन गया।
विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं हमेशा अपनी विचारधारा के मार्ग पर चला। कभी विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी से कटुता नहीं पाली। मतभेद होते थे विचारधारा में मतभेद होंगे, लेकिन मनभेद होने का मैंने कभी मौका नहीं दिया। हो सकता है कि मेरे भाषण में कई बार कटुता आई हो किसी को बुरा लगा हो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। उन्होंने कहा कि उनके संबंध उन लोगों के साथ भी बहुत अच्छे रहे हैं जिनकी विचारधारा से वे कभी सहमत न थे न हूं और न रहूंगा।
राजीव गांधी और चंद्रशेखर को भी किया याद
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं उस लोकसभा में भी रहा जिसमें अटल जी, राजीव जी, चंद्रशेखर जी भी थे। इंदिरा जी ने मुझे कांग्रेस में प्रवेश दिया। इन लोगों से प्रभावित होकर मैंने अपना राजनीतिक सफर पूरा किया है। उन्होंने कहा कि सदन में जो डिस्टर्बेंस होते हैं मैं कभी भी उसके पक्ष में नहीं रहा। लोकतंत्र की बुनियाद है चर्चा और सदन में ये सत्तापक्ष की जवाबदारी होती है कि वो विपक्ष के साथ चर्चा होने के बाद और कोई रास्ता निकालें।
अटलजी की पंक्तियों से दिया संदेश
दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों के माध्यम से न केवल अपनी मंशा साफ की, बल्कि कांग्रेस तक संदेश पहुंचाने की कोशिश भी कि है कि वे अभी थके नहीं हैं। अपने भाषण में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मशहूर पंक्तियां याद करते हुए कहा कि वे न थके हैं और न ही रिटायर हुए हैं, आगे भी सक्रिय रहकर काम करते रहेंगे।
न काहू से दोस्ती न काहू से बैर
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सत्ता जाने से लेकर कई विवादों में रहे दिग्विजय सिंह ने आज अपने भाषण के अंत में कबीरदास की पंक्तियां दोहराईं। दिग्विजय ने कहा मैं अपने राजनीतिक जीवन में जैसा कबीरदास जी कह गए थे उन पंक्तियों पर चलता हूं। कबिरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर।