सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर अंतरिम रोक का दिया संकेत; आज फिर सुनवाई .
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर अंतरिम रोक का दिया संकेत; आज फिर सुनवाई
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर अंतरिम आदेश के जरिये रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि कोर्ट ने अभी कानून के प्रभाव में आने पर तत्काल रोक नहीं लगाई है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अंतरिम आदेश संतुलन बनाए रखेगा और इसमें तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया:
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अदालत द्वारा वक्फ घोषित संपत्ति को गैर अधिसूचित नहीं किया जाएगा – यानी ऐसी संपत्ति को गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा, भले ही वह वक्फ उपयोगकर्ता द्वारा घोषित हो या विलेख के माध्यम से।
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कलेक्टर संपत्ति की जांच कर सकते हैं, लेकिन यह प्रावधान लागू नहीं होगा कि जांच के दौरान संपत्ति को गैर-वक्फ घोषित किया जाए।
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वक्फ बोर्ड और परिषद में केवल पदेन सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं, अन्य सभी सदस्य मुस्लिम होने चाहिएं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून को लेकर देश में हो रही हिंसा पर चिंता जताई और मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि वह 72 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जो अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ कानून 1995 की वैधता को चुनौती दे रही हैं। कोर्ट ने इन याचिकाओं को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का भी प्रस्ताव दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया और न ही किसी पक्ष को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि अंतरिम आदेश पारित करने से पहले विस्तृत सुनवाई होनी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को फिर से सुनवाई कर अंतरिम आदेश पर विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर अंतरिम रोक का दिया संकेत; आज फिर सुनवाई
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर अंतरिम आदेश के जरिये रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि कोर्ट ने अभी कानून के प्रभाव में आने पर तत्काल रोक नहीं लगाई है।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अंतरिम आदेश संतुलन बनाए रखेगा और इसमें तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया:
अदालत द्वारा वक्फ घोषित संपत्ति को गैर अधिसूचित नहीं किया जाएगा – यानी ऐसी संपत्ति को गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा, भले ही वह वक्फ उपयोगकर्ता द्वारा घोषित हो या विलेख के माध्यम से।
कलेक्टर संपत्ति की जांच कर सकते हैं, लेकिन यह प्रावधान लागू नहीं होगा कि जांच के दौरान संपत्ति को गैर-वक्फ घोषित किया जाए।
वक्फ बोर्ड और परिषद में केवल पदेन सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं, अन्य सभी सदस्य मुस्लिम होने चाहिएं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून को लेकर देश में हो रही हिंसा पर चिंता जताई और मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि वह 72 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जो अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ कानून 1995 की वैधता को चुनौती दे रही हैं। कोर्ट ने इन याचिकाओं को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का भी प्रस्ताव दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया और न ही किसी पक्ष को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि अंतरिम आदेश पारित करने से पहले विस्तृत सुनवाई होनी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को फिर से सुनवाई कर अंतरिम आदेश पर विचार करेगी।