तहसीलदार कार्यालय ने डेली कॉलेज को राजस्व जमा कराने के लिए भेजा अंतिम नोटिस, पहले नोटिस का भी नहीं मिला था जवाब.
इंदौर। इंदौर का प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान बकाया राजस्व वसूली को लेकर परेशान है। नगर निगम कहता है कि उसकी दी हुई लीज की जमीन है, इधर, कलेक्टर कार्यालय बकाया राजस्व जमा कराने के लिए लगातार नोटिस जारी कर रहा है। डेली कॉलेज प्रबंधन को समझ नहीं आ रहा कि वह टैक्स कहां जमा कराए। प्रबंधन ने इस मामले में हाईकोर्ट की शरण भी ली है।
तहसीलदार जूनी इंदौर ने डेली कॉलेज प्रबंधन को बकाया जमा कराने के लिए कई नोटिस भेजे। 23 मार्च 26 को तहसीलदार ने कॉलेज को दो अंतिम मांग सूचना पत्र जारी किया है। इसमें लिखा गया है कि अनुविभागीय अधिकारी जूनी इंदौर के प्रकरण क्रमांक 0387/अ-2/2024-25 में पारित आदेश दिनांक 18 मार्च 2026 के आधार पर भूराजस्व का निर्धारण किया गया है। ग्राम मूसाखेड़ी स्थित भूमि खसरा क्रमांक 1 कुल रकबा 334870 वर्गफीट पर कुल बकाया भू राजस्व राशि 15,069, 150 रुपए जमा करवाये जाने हेतु आपको मांग सूचना पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके जवाब में कोई राशि नहीं जमा कराई गई है। अंतिम सूचना पत्र में तीन दिन में राशि जमा कराने का समय दिया गया है।
एक दूसरे नोटिस में ग्राम चितावद की जमीन का उल्लेख करते हुए 13,35,510 रुपए जमा कराने को कहा गया है। इस नोटिस में लिखा है कि अनुविभागीय अधिकारी जूनी इंदौर के प्रकरण क्रमांक 0390/अ-2/2024-25 में पारित आदेश दिनांक 18 मार्च 2026 के आधार पर भूराजस्व का निर्धारण किया गया है। इसके अनुसार ग्राम चितावद स्थित भूमि खसरा क्रमांक 314 कुल रकबा 29670 वर्गफीट पर कुल बकाया भू राजस्व राशि 13,35,510 रुपए जमा करवाने के लिए मांग सूचना पत्र प्रेषित किया गया था, लेकिन अब तक राशि जमा नहीं हुई। इस नोटिस में भी तीन दिन में राशि जमा कराने को कहा गया है।
पता तो चले कि किसे देनी है राशि-लुल्ला
इस मामले में डेली कॉलेज बोर्ड के सदस्य धीरज लुल्ला का कहना है कि नगर निगम बोलता है कि हमारी जमीन है। इतने सालों से लीज भी ले रहा है। लीज का एग्रीमेंट भी है। कुछ समय पहले लोअर कोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में डिक्री कर दी थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में सालों से मामला चल रहा है। इसी बीच जिला प्रशासन कहता है कि यह जमीन हमारी है। लुल्ला ने कहा कि इस मामले में भी कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में केस लगा दिया है। हमें राजस्व देने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन पता तो चले कि किसे देना है। कोर्ट जैसा कहेगा, वैसा हम करेंगे।