जनता को 'उल्लू' बनता देख नेताओं पर भड़का उल्लू, कहा-हमारी कौम को बदनाम कर रखा है, अब तो भारत में रहने की इच्छा ही नहीं होती.
-अर्द्धेन्दु भूषण, कंसल्टिंग एडिटर
आज एक अप्रैल यानी मूर्ख दिवस है। हालांकि अब इस दिवस की प्रासंगिकता नहीं रही, क्योंकि आम जनता तो साल के पूरे 365 दिन उल्लू बनती रहती है। कभी धर्म के नाम पर, कभी जाति के नाम पर तो कभी देश के नाम पर नेता हमें उल्लू बनाकर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं। फिर भी चूंकि एक अप्रैल को उल्लू बनने और बनाने की परंपरा रही है, मैंने सोचा क्यों न इस बारे में किसी उल्लू से ही बात कर ली जाए। मैं सुबह-सुबह इंदौर के लालबाग में सैर करने पहुंच गया। हालांकि अब वहां बाग के नाम पर ईंट-पत्थर के ढांचे खड़े हो रहे हैं, फिर भी काफी प्रयास के बाद बचे-खुचे पेड़ों की डाली पर एक उल्लू महाराज के दर्शन हो गए।
मैंने पूछा-आज तो प्रसन्न होगे उल्लू महाराज। आज के दिन आपके ही नाम से लोगों को उल्लू बनाया जाता है।
उल्लू बोला-काहे की प्रसन्नता। आज के दिन की बात मत करो, यहां तो हर दिन हमारी कौम बदनाम हो रही है।
मैंने पूछा-आपकी कौम क्यों बदनाम हो रही है, उल्टा आपका ही नाम हो रहा है?
उल्लू बोला-तुम भी उल्लू हो क्या? देख नहीं रहे हर दिन नेता तुम्हें कैसे उल्लू बनाते हैं और बदनामी हमारी होती है। हम तो पेड़ पर छुपकर बैठे ही रह जाते हैं और वे लाल बत्तियों में हूटर बजाकर घूमते हुए पूरी जनता को उल्लू बना आते हैं।
मैंने पूछा-आखिर ऐसा क्या हुआ भाई कि तुम हमारे देश के कर्णधारों पर ऊंगली उठा रहे हो?
उल्लू बोला-तुम सचमुच उल्लू ही हो। क्या तुम्हें यह पता नहीं कि नेता तुम्हें झूठ बोल-बोल कर किस तरह उल्लू बना रहे हैं।
मैंने कहा-मुझे तो ऐसा नहीं लगता। वे बेचारे दिन रात देश की सेवा में जुटे रहते हैं, उन्हें भला ऐसे कामों के लिए फुर्सत कहां?
उल्लू बोला-तुम भक्त हो क्या? क्योंकि ऐसे बयान तो भक्त ही दिया करते हैं। भले ही भूखे मर जाएं, लेकिन भक्ति में जोर-जोर से नारे लगाते रहेंगे, मानों उनसे ज्यादा सुखी-संपन्न कोई नहीं है। इसी भक्ति के नाम पर तो तुम लोगों को हर कदम पर उल्लू बनाया जा रहा है।
मैंने कहा-तुम शायद अपने नाम के दुरुपयोग से दुखी हो?
उल्लू बोला-हम अपने नाम के दुरुपयोग से दुखी नहीं है, दुख तो इस बात का है कि हम उल्लू बनाने का काम ही नहीं करते, फिर भी हमें बदनाम किया जाता है। तुम्हारे चुटकुलों और मुहावरों में हमारे नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
मैंने पूछा-इससे तो तुम्हारी कौम को और फायदा है, तुम्हें खुश होना चाहिए?
उल्लू बोला-तुम कैसे कह रहे हो कि हमारी कौम का फायदा हो रहा है। अरे, हम भी पक्षी हैं, जब हम भोली-भाली जनता को उल्लू बनता देखते हैं न तो कलेजा फट जाता है। हम तो लक्ष्मी के वाहन हैं, हमारा काम किसी का नुकसान करना थोड़े ही हैं। हम तो किसी नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन यह जो सफेद वस्त्र में जनता के बीच खुलेआम घूमते हैं न, वे हमसे ज्यादा खतरनाक हैं।
मैंने पूछा-जनता इतनी उल्लू थोड़े ही है कि उल्लू बन जाए?
उल्लू बोला-यही तो विडंबना है कि जनता उल्लू न होते हुए भी उल्लू बनने को मजबूर है। अब देखो ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका मिलकर हमला कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल-एलपीजी सबका संकट हो रहा है, लेकिन नेता कह रहे हैं सब ठीक है।
मैंने कहा-सब ठीक ही तो है। लोग तो कांग्रेस वालों के बहकावे में गैस एजेसियों और पेट्रोल पंपों के बाहर लाइन लगा रहे हैं?
उल्लू बोला-लो बन गए न उल्लू और दिखा दी न भक्ती। अरे जब सब ठीक है तो इनके दाम बढ़ क्यों रहे? अभी तो आपने प्रीमियम पेट्रोल, कमर्शियल सिलेंडर और जेट फ्यूल के दाम बढाए। क्या इसके बाद साधारण पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर का नंबर नहीं आएगा? माना कि नंबर नहीं भी आया तो क्या इसका असर अन्य चीजों पर नहीं पड़ेगा। अब देख लो न होटले-रेस्टोरेंट वालों ने कैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए। अन्य वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी और तुम उल्लू बनते रहोगे।
मैंने पूछा-हमारे देश के सारे बड़े नेता यहां तक कि विश्व गुरु भी बोल रहे हैं कुछ नहीं होगा।
उल्लू बोला-अब तुम जाओ। तुम पूरी तरह उल्लू बन चुके हो और तुम्हारी आंखों पर भक्ति का चश्मा चढ़ गया है। तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जब तुम नोटबंदी और कोरोना के तीन-तीन लहर से जिंदा निकल आए तो यह पेट्रोल-डीजल-एलपीजी तुम्हारा क्या बिगाड़ेगी। लाइन में लग कर जयकारे लगाते रहो।
और हां, तुम्हें मूर्ख दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।