हिमाचल प्रदेश : बादल फटने और भारी बारिश से तबाही, 10 मौतें और 30 लापता.
हिमाचल प्रदेश : बादल फटने और भारी बारिश से तबाही, 10 मौतें और 30 लापता
हिमाचल प्रदेश के मंडी, कांगड़ा, सोलन और ऊना सहित कई जिलों में बादल फटने और लगातार बारिश ने बड़ी तबाही मचा दी है। मंडी जिले में सात स्थानों पर बादल फटने से 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 लापता हैं। राज्य‑भर में 406 सड़कें बंद हैं, 1,515 ट्रांसफॉर्मर खराब हुए और 171 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नुकसान का प्रारंभिक अनुमान ₹500 करोड़ बताया और राहत‑पुनर्वास कार्यों में तेजी के निर्देश दिए।

प्रमुख बिंदु
- मंडी में सबसे ज़्यादा असर
- गोहर, करसोग, थुनाग व धर्मपुर उपमंडल में भारी तबाही।
- 24 घर व 12 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त; पांच पुल बह गए।
- एनडीआरएफ‑एसडीआरएफ की टीमें 132 लोगों को बचा चुकी हैं; रेस्क्यू जारी।
- अन्य जिलों में हालात
- कांगड़ा में तापमान सामान्य से 11 डिग्री नीचे, कई इलाके जलमग्न।
- सोलन के कोटलानाला में भूस्खलन; मजदूर सुरक्षित निकाले गए।
- ऊना की स्वां नदी में बाढ़ से फंसे 5 प्रवासी मज़दूरों को 2.25 घंटे में रेस्क्यू।
- परिवहन व बिजली प्रभावित
- पठानकोट‑मंडी और कीरतपुर‑मनाली फोरलेन जगह‑जगह बाधित; 1,000 से ज़्यादा वाहन फंसे।
- लारजी व डैहर पावर हाउस सहित कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन ठप।
- कालका‑शिमला रेल मार्ग पर भूस्खलन से ट्रेनों में देरी।
- मौसम विभाग की चेतावनी
- 3 जुलाई तक व्यापक भारी वर्षा, 4‑5 जुलाई को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट।
- कांगड़ा और सोलन में ‘‘बहुत भारी’’ वर्षा की संभावना; मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, शिमला व सिरमौर को ‘‘भारी’’ वर्षा का अलर्ट।
- सरकारी राहत‑बचाव कार्य
- अब तक 287 लोगों का सफल रेस्क्यू।
- प्रभावित क्षेत्रों में 500 करोड़ ₹ से अधिक के नुकसान की आशंका; आगे बढ़ सकता है आंकड़ा।
- मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा‑पीड़ितों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया, बिजली‑सड़कें बहाल करने के निर्देश दिए।
लगातार बादल फटने और भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में जन जीवन अस्त‑व्यस्त हो गया है। प्रशासन और बचाव दल राहत कार्यों में जुटे हैं, पर हालात अभी भी गंभीर हैं। लोगों से सतर्क रहने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
हिमाचल प्रदेश : बादल फटने और भारी बारिश से तबाही, 10 मौतें और 30 लापता
हिमाचल प्रदेश के मंडी, कांगड़ा, सोलन और ऊना सहित कई जिलों में बादल फटने और लगातार बारिश ने बड़ी तबाही मचा दी है। मंडी जिले में सात स्थानों पर बादल फटने से 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 लापता हैं। राज्य‑भर में 406 सड़कें बंद हैं, 1,515 ट्रांसफॉर्मर खराब हुए और 171 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नुकसान का प्रारंभिक अनुमान ₹500 करोड़ बताया और राहत‑पुनर्वास कार्यों में तेजी के निर्देश दिए।
प्रमुख बिंदु
मंडी में सबसे ज़्यादा असर
गोहर, करसोग, थुनाग व धर्मपुर उपमंडल में भारी तबाही।
24 घर व 12 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त; पांच पुल बह गए।
एनडीआरएफ‑एसडीआरएफ की टीमें 132 लोगों को बचा चुकी हैं; रेस्क्यू जारी।
अन्य जिलों में हालात
कांगड़ा में तापमान सामान्य से 11 डिग्री नीचे, कई इलाके जलमग्न।
सोलन के कोटलानाला में भूस्खलन; मजदूर सुरक्षित निकाले गए।
ऊना की स्वां नदी में बाढ़ से फंसे 5 प्रवासी मज़दूरों को 2.25 घंटे में रेस्क्यू।
परिवहन व बिजली प्रभावित
पठानकोट‑मंडी और कीरतपुर‑मनाली फोरलेन जगह‑जगह बाधित; 1,000 से ज़्यादा वाहन फंसे।
लारजी व डैहर पावर हाउस सहित कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन ठप।
कालका‑शिमला रेल मार्ग पर भूस्खलन से ट्रेनों में देरी।
मौसम विभाग की चेतावनी
3 जुलाई तक व्यापक भारी वर्षा, 4‑5 जुलाई को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट।
कांगड़ा और सोलन में ‘‘बहुत भारी’’ वर्षा की संभावना; मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, शिमला व सिरमौर को ‘‘भारी’’ वर्षा का अलर्ट।
सरकारी राहत‑बचाव कार्य
अब तक 287 लोगों का सफल रेस्क्यू।
प्रभावित क्षेत्रों में 500 करोड़ ₹ से अधिक के नुकसान की आशंका; आगे बढ़ सकता है आंकड़ा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा‑पीड़ितों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया, बिजली‑सड़कें बहाल करने के निर्देश दिए।
लगातार बादल फटने और भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में जन जीवन अस्त‑व्यस्त हो गया है। प्रशासन और बचाव दल राहत कार्यों में जुटे हैं, पर हालात अभी भी गंभीर हैं। लोगों से सतर्क रहने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।