चंडीगढ़ में एचआईवी का बढ़ता खतरा: एक साल में 102% उछाल, मौतें भी दोगुनी
चंडीगढ़ में एचआईवी संक्रमण के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में 166 नए एचआईवी मामले सामने आए, जबकि 2023 में यह संख्या 82 थी। यानी सिर्फ एक साल में मामलों में 102% की वृद्धि हुई है।
मौतों में भी दोगुनी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में एचआईवी से 17 मौतें हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 35 हो गईं। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि संक्रमण के साथ-साथ मृत्यु दर भी बढ़ रही है।
हर 208वां व्यक्ति संक्रमित
चौंकाने वाली बात यह है कि शहर में हर 208वां व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित है। यह अनुपात सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव और जागरूकता व रोकथाम उपायों की जरूरत को रेखांकित करता है।
2030 उन्मूलन लक्ष्य पर सवाल
भारत ने 2030 तक एचआईवी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, लेकिन चंडीगढ़ के ये आंकड़े उस लक्ष्य की दिशा में गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्टिंग, जागरूकता अभियान, सुरक्षित व्यवहार और समय पर इलाज को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण की रफ्तार पर लगाम लगाने और प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की है।
चंडीगढ़ में एचआईवी का बढ़ता खतरा: एक साल में 102% उछाल, मौतें भी दोगुनी
चंडीगढ़ में एचआईवी संक्रमण के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में 166 नए एचआईवी मामले सामने आए, जबकि 2023 में यह संख्या 82 थी। यानी सिर्फ एक साल में मामलों में 102% की वृद्धि हुई है।
मौतों में भी दोगुनी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में एचआईवी से 17 मौतें हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 35 हो गईं। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि संक्रमण के साथ-साथ मृत्यु दर भी बढ़ रही है।
हर 208वां व्यक्ति संक्रमित
चौंकाने वाली बात यह है कि शहर में हर 208वां व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित है। यह अनुपात सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव और जागरूकता व रोकथाम उपायों की जरूरत को रेखांकित करता है।
2030 उन्मूलन लक्ष्य पर सवाल
भारत ने 2030 तक एचआईवी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, लेकिन चंडीगढ़ के ये आंकड़े उस लक्ष्य की दिशा में गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्टिंग, जागरूकता अभियान, सुरक्षित व्यवहार और समय पर इलाज को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण की रफ्तार पर लगाम लगाने और प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की है।