महाराष्ट्र में टीपू पर सियासी संग्राम: सामना का बीजेपी-कांग्रेस पर तीखा प्रहार.
महाराष्ट्र में टीपू पर सियासी संग्राम: सामना का बीजेपी-कांग्रेस पर तीखा प्रहार
महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों टीपू सुल्तान के नाम पर गरमा गई है। विवाद की शुरुआत मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से हुई, जिसके बाद बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र सामना ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया है।
तस्वीर से शुरू हुआ विवाद
मालेगांव के शान-ए-हिंद हॉल में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने पर विवाद खड़ा हुआ। हालांकि बाद में तस्वीर हटा दी गई, लेकिन राजनीतिक बहस थमने का नाम नहीं ले रही। संपादकीय में लिखा गया कि औरंगजेब व अफजल खान की तरह टीपू सुल्तान को भी कब्र से बाहर निकालकर” राजनीति की जा रही है।
शिवाजी महाराज से तुलना पर तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी महाराज से किए जाने पर ‘सामना’ ने कड़ी आपत्ति जताई। लेख में कहा गया कि यह तुलना असंगत और अनुचित है।
संपादकीय के मुताबिक, शिवाजी महाराज ने ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना शून्य से की, जबकि टीपू सुल्तान को राज्य विरासत में मिला था। लेख में यह भी उल्लेख है कि 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में टीपू की मृत्यु हुई और कुछ इतिहासकार उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला पहला स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं।
बीजेपी पर दोहरे रवैये का आरोप
संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए सवाल उठाया गया कि यदि टीपू को लेकर इतना आक्रोश है, तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैचों पर चुप्पी क्यों?
लेख में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह का नाम लेते हुए कहा गया कि अगर टीपू के प्रति गुस्सा वास्तविक है तो भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैचों और उनके आयोजकों की भी आलोचना होनी चाहिए।
‘सामना’ ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह टीपू सुल्तान के नाम पर अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार रुख अपनाती है और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का प्रयास करती है।
इतिहास बनाम वर्तमान राजनीति
संपादकीय में यह भी कहा गया कि टीपू सुल्तान के शासनकाल में हिंदुओं के जबरन धर्मांतरण और अत्याचार के आरोपों को लेकर विवाद होता रहा है। वहीं शिवाजी महाराज की विरासत को अद्वितीय बताते हुए कहा गया कि उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
लेख के अंत में सवाल उठाया गया कि टीपू सुल्तान अब इतिहास का हिस्सा हैं, लेकिन बीजेपी को जवाब देना चाहिए कि वह वर्तमान मुद्दों पर क्या कर रही है।
महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान के नाम पर छिड़ी यह बहस फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही, और आने वाले दिनों में यह विवाद और सियासी रंग पकड़ सकता है।