बलूचिस्तान में दमन पर उतरी पाकिस्तान की सेना, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई कड़ी चिंता.
बलूचिस्तान में दमन पर उतरी पाकिस्तान की सेना, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई कड़ी चिंता
पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में बढ़ती बगावत को दबाने के लिए दमन की नीति अपनाई है। बड़ी संख्या में बलोच कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इस पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कड़ी चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार की आलोचना की है।

बलोच कार्यकर्ताओं पर अत्याचार
बलोच यकजेती कमेटी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और पुलिस द्वारा बलोच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अब एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन और दमन करने का आरोप लगाया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल का बयान
एमनेस्टी इंटरनेशनल दक्षिण एशिया के निदेशक बाबू राम पंत ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान सरकार बलोच कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने के लिए हिरासत में ले रही है। उन्होंने इसे बलोच समुदाय के अधिकारों पर व्यवस्थित हमला बताया।
पंत ने मांग की :
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बलोच कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
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उन्हें बोलने की आजादी मिले।
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महरंग बलोच और बेबर्ग जहरी जैसे कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच हो।
बेबर्ग जहरी की हालत पर चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विशेष रूप से बेबर्ग जहरी की हालत को लेकर चिंता जताई है। वे दिव्यांग हैं और चिकित्सीय सहायता के अभाव में उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार खराब हो रही है।
आतंकवाद के आरोप और फर्जी मुकदमे
बलोच यकजेती कमेटी ने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार बलोच समुदाय में डर पैदा करने के लिए हिंसा और दमन का सहारा ले रही है।
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22 मार्च को महरंग बलोच और 17 अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
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महरंग पर आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं।
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कराची में बलोच लोगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने पर शम्मी दीन बलोच समेत छह बलोच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
निष्कर्ष
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन एजेंसियां बलोच लोगों के मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन कर रही हैं। कई कार्यकर्ताओं पर फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं और जमानत मिलने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया है।
बलोच यकजेती कमेटी ने कहा है कि बलोच लोग इस दमन से डरने वाले नहीं हैं और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
बलूचिस्तान में दमन पर उतरी पाकिस्तान की सेना, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई कड़ी चिंता
पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में बढ़ती बगावत को दबाने के लिए दमन की नीति अपनाई है। बड़ी संख्या में बलोच कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इस पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कड़ी चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार की आलोचना की है।
बलोच कार्यकर्ताओं पर अत्याचार
बलोच यकजेती कमेटी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और पुलिस द्वारा बलोच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अब एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन और दमन करने का आरोप लगाया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल का बयान
एमनेस्टी इंटरनेशनल दक्षिण एशिया के निदेशक बाबू राम पंत ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान सरकार बलोच कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने के लिए हिरासत में ले रही है। उन्होंने इसे बलोच समुदाय के अधिकारों पर व्यवस्थित हमला बताया।
पंत ने मांग की :
बलोच कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
उन्हें बोलने की आजादी मिले।
महरंग बलोच और बेबर्ग जहरी जैसे कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच हो।
बेबर्ग जहरी की हालत पर चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विशेष रूप से बेबर्ग जहरी की हालत को लेकर चिंता जताई है। वे दिव्यांग हैं और चिकित्सीय सहायता के अभाव में उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार खराब हो रही है।
आतंकवाद के आरोप और फर्जी मुकदमे
बलोच यकजेती कमेटी ने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार बलोच समुदाय में डर पैदा करने के लिए हिंसा और दमन का सहारा ले रही है।
22 मार्च को महरंग बलोच और 17 अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
महरंग पर आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं।
कराची में बलोच लोगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने पर शम्मी दीन बलोच समेत छह बलोच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
निष्कर्ष
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन एजेंसियां बलोच लोगों के मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन कर रही हैं। कई कार्यकर्ताओं पर फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं और जमानत मिलने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया है।
बलोच यकजेती कमेटी ने कहा है कि बलोच लोग इस दमन से डरने वाले नहीं हैं और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।