एआई समिट में पीएम मोदी का विजन: “भारत को एआई में डर नहीं, भविष्य की अपार संभावनाएं दिखती हैं”.
एआई समिट में पीएम मोदी का विजन: “भारत को एआई में डर नहीं, भविष्य की अपार संभावनाएं दिखती हैं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई समिट को संबोधित करते हुए कहा कि इस मंच पर उपस्थित सभी प्रतिभागी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नई तकनीक को लेकर शुरुआत में संदेह होना स्वाभाविक है, लेकिन भारत के युवा जिस आत्मविश्वास और तेजी से एआई को अपना रहे हैं, वह एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत है।
उन्होंने कहा कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य या किसी भी क्षेत्र में प्रस्तुत किए जा रहे समाधान ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को सशक्त रूप से दर्शाते हैं।
भारत: युवा शक्ति और टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस भारत में यह समिट आयोजित हो रही है, वह दुनिया की छठी हिस्सेदारी वाली मानवता का प्रतिनिधित्व करता है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है और सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र भी है।
उन्होंने बताया कि 100 से अधिक देशों की भागीदारी और विश्व के विभिन्न कोनों से आए विशेषज्ञ इस समिट को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। विशेष रूप से युवाओं की बड़ी उपस्थिति एक नए विश्वास और ऊर्जा का संचार करती है।
एआई का लोकतंत्रीकरण: मानव केंद्र में रहे
पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि एआई का लोकतंत्रीकरण आवश्यक है, ताकि मनुष्य केवल डेटा पॉइंट या कच्चा माल बनकर न रह जाए। उन्होंने कहा कि एआई को आगे बढ़ने की स्वतंत्रता देनी होगी, लेकिन उसकी दिशा और नियंत्रण मानव के हाथों में रहना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के संदर्भ में कहा कि एआई को समावेशन और सशक्तिकरण का साधन बनाना होगा। भारत का मानना है कि एआई से वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब इसे साझा किया जाए और इसे वैश्विक साझा हित के रूप में विकसित किया जाए।
शक्ति और जिम्मेदारी साथ-साथ
प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से बदलाव लाने वाली एक शक्तिशाली ताकत है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह समाधान प्रदान करती है, लेकिन अगर यह अपने लक्ष्यों से भटक जाए तो विनाशकारी भी साबित हो सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के लिए भारत का मानदंड “सभी का कल्याण और खुशी” है।
एआई में भारत को दिखता है भाग्य, भय नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि एआई की मदद से भारत के युवा परिवर्तन के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। भारत एआई को डर की दृष्टि से नहीं, बल्कि अवसर और भाग्य के रूप में देखता है।
उन्होंने कहा कि एआई इतिहास के सबसे बड़े परिवर्तनों में से एक है। आज जिसके पास डेटा है, उसके पास अधिकार भी है। इसलिए यह हमारे ऊपर निर्भर है कि हम एआई को किस दिशा में ले जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि हम वर्तमान में एआई का उपयोग करके क्या कर सकते हैं। भारत नई तकनीक न केवल विकसित करता है, बल्कि उसे तेजी से अपनाकर दुनिया के सामने उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।