भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई रफ्तार: INDO-PACOM कमांडर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जमकर सराहना.
नई दिल्ली दौरे पर आए अमेरिका के हिंद-प्रशांत कमान (United States Indo-Pacific Command) के कमांडर एडमिरल पपारो ने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खुलकर प्रशंसा की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारतीय सेना ने अद्भुत संयम, रणनीतिक सटीकता और शक्ति का परिचय देकर शांति बनाए रखने की मिसाल पेश की है।
संयम और रणनीतिक दक्षता की सराहना
एडमिरल पपारो ने कहा कि ऐसे अभियानों को देखकर सभी शांतिप्रिय राष्ट्र चिंतित हो जाते हैं, लेकिन भारत ने जिस संतुलन और नियंत्रण का प्रदर्शन किया, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के टैक्टिकल निष्पादन और ऑपरेशन के बाद किए गए आत्ममंथन की तारीफ की, जिससे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सबक निकाले गए।
चीनी मूल के हथियारों पर संकेत, बढ़ती आक्रामकता पर चिंता
पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए चीनी मूल के हथियारों—मिसाइल और गाइडेंस सिस्टम—का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से कई अहम सबक मिले हैं। लंबी दूरी के हथियारों और जटिल “किल चेन” की समझ और तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती ‘कोएर्शन’ और ‘एग्रेशन’ पर गंभीर चिंता जताई।
मजबूत साझेदारी से बढ़ता डिटरेंस
पपारो ने कहा, “हमारी साझेदारी का डिटरेंस पर एक्सपोनेंशियल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह शांति बनाए रखने के साझा उद्देश्य को दर्शाती है।”
उन्होंने भारत के हिंद महासागर क्षेत्र में योगदान की सराहना की और कहा कि दोनों देश संप्रभुता, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री आजादी के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
हिंद-प्रशांत: रणनीतिक रूप से सबसे अहम क्षेत्र
उन्होंने बताया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया की लगभग 60% आबादी, 60% से अधिक वैश्विक GDP और शीर्ष 10 सेनाओं में से 7 मौजूद हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत-अमेरिका जैसी मजबूत साझेदारियां बेहद जरूरी हैं।
एडमिरल पपारो का यह बयान ऐसे समय आया है जब हिंद-प्रशांत में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।