दक्षिण एशिया में जलवायु आपदाओं से 4.7 करोड़ बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत: यूनीसेफ.
दक्षिण एशिया में जलवायु आपदाओं से 4.7 करोड़ बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत: यूनीसेफ
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि 2025 तक दक्षिण एशिया में जलवायु संबंधी आपदाओं, स्वास्थ्य संकटों, और आर्थिक झटकों के कारण लगभग 4 करोड़ 70 लाख बच्चों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी। सहायता के लिए यूनीसेफ ने 1.6 अरब डॉलर की अपील की है, जिससे 2.8 करोड़ लोगों, जिनमें 1.6 करोड़ बच्चे शामिल हैं, तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाई जाएगी।

प्रमुख कारण:
दक्षिण एशिया के लिए यूनीसेफ के क्षेत्रीय निदेशक संजय विजेसेकेरा ने बताया कि बच्चों पर जलवायु आपदाओं जैसे बाढ़, भूस्खलन, समुद्री तूफान और सूखे का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ये आपदाएं अक्सर मानसून के दौरान बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य आपातस्थिति, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता इन चुनौतियों को और गंभीर बना रहे हैं।
सहायता योजनाएं:
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अफगानिस्तान:
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1 करोड़ बच्चों तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाई जाएगी।
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आर्थिक कठिनाइयों और महिलाओं पर प्रतिबंधों के कारण बच्चों की स्थिति अत्यंत गंभीर।
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बांग्लादेश:
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5.29 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों सहित 21 लाख लोगों को सहायता।
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11 लाख बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों को मानसिक और मनोवैज्ञानिक समर्थन।
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पाकिस्तान:
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जलवायु संकट, कुपोषण और राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित 35 लाख बच्चों तक सहायता।
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जलवायु जोखिमों में दुनिया में पांचवें स्थान पर।
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अन्य देश:
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नेपाल और भूटान में भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन का उच्च जोखिम।
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श्रीलंका में आर्थिक संकट के साथ-साथ जलवायु जोखिम।
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मालदीव पर समुद्र स्तर वृद्धि और आर्थिक कठिनाइयों का प्रभाव।
यूनीसेफ की प्राथमिकताएं:
यूनीसेफ की अपील के जरिए जुटाई गई धनराशि से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण, पानी और स्वच्छता सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।
यह पहल दक्षिण एशिया के बच्चों और उनके परिवारों को संकटों से उबरने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है।
दक्षिण एशिया में जलवायु आपदाओं से 4.7 करोड़ बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत: यूनीसेफ
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि 2025 तक दक्षिण एशिया में जलवायु संबंधी आपदाओं, स्वास्थ्य संकटों, और आर्थिक झटकों के कारण लगभग 4 करोड़ 70 लाख बच्चों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी। सहायता के लिए यूनीसेफ ने 1.6 अरब डॉलर की अपील की है, जिससे 2.8 करोड़ लोगों, जिनमें 1.6 करोड़ बच्चे शामिल हैं, तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाई जाएगी।
प्रमुख कारण:
दक्षिण एशिया के लिए यूनीसेफ के क्षेत्रीय निदेशक संजय विजेसेकेरा ने बताया कि बच्चों पर जलवायु आपदाओं जैसे बाढ़, भूस्खलन, समुद्री तूफान और सूखे का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ये आपदाएं अक्सर मानसून के दौरान बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य आपातस्थिति, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता इन चुनौतियों को और गंभीर बना रहे हैं।
सहायता योजनाएं:
अफगानिस्तान:
1 करोड़ बच्चों तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाई जाएगी।
आर्थिक कठिनाइयों और महिलाओं पर प्रतिबंधों के कारण बच्चों की स्थिति अत्यंत गंभीर।
बांग्लादेश:
5.29 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों सहित 21 लाख लोगों को सहायता।
11 लाख बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों को मानसिक और मनोवैज्ञानिक समर्थन।
पाकिस्तान:
जलवायु संकट, कुपोषण और राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित 35 लाख बच्चों तक सहायता।
जलवायु जोखिमों में दुनिया में पांचवें स्थान पर।
अन्य देश:
नेपाल और भूटान में भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन का उच्च जोखिम।
श्रीलंका में आर्थिक संकट के साथ-साथ जलवायु जोखिम।
मालदीव पर समुद्र स्तर वृद्धि और आर्थिक कठिनाइयों का प्रभाव।
यूनीसेफ की प्राथमिकताएं:
यूनीसेफ की अपील के जरिए जुटाई गई धनराशि से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण, पानी और स्वच्छता सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।
यह पहल दक्षिण एशिया के बच्चों और उनके परिवारों को संकटों से उबरने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है।