ईरान: मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर.
ईरान: मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर
अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेईके निधन की खबर के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है।
क्रांति की विरासत से सत्ता के केंद्र तक
मोजतबा का बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ एक प्रमुख धार्मिक नेता के रूप में उभर रहे थे। 1979 की इस्लामी क्रांति ने खामेनेई परिवार की राजनीतिक हैसियत को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें नए इस्लामी गणराज्य के सत्ता केंद्र में ला खड़ा किया।
तेहरान आने के बाद मोजतबा ने अलावी हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, जिसे शासन से जुड़े प्रभावशाली परिवारों का संस्थान माना जाता है। बाद में उन्होंने कोम में धार्मिक शिक्षा ली और रूढ़िवादी धर्मगुरुओं के संपर्क में आए। हालांकि दशकों तक धार्मिक अध्ययन करने के बावजूद वे ‘अयातुल्ला’ का औपचारिक दर्जा हासिल नहीं कर सके — जो ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर पद के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त माना जाता है। यही मुद्दा वरिष्ठ धार्मिक हलकों में बहस का विषय बना हुआ है।
युद्ध से सुरक्षा नेटवर्क तक
ईरान-इराक युद्ध के दौरान मोजतबा ने हबीब बटालियन में सेवा की। इसी दौर में उनके संबंध उन अधिकारियों से बने जो आगे चलकर ईरान की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में प्रभावशाली पदों पर पहुंचे। विश्लेषकों के अनुसार, उनकी ताकत का बड़ा स्रोत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से करीबी रिश्ते हैं, जो ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा नीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
परदे के पीछे की भूमिका
हालांकि मोजतबा ने कभी कोई निर्वाचित या औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन अंदरूनी सूत्र उन्हें सुप्रीम लीडर कार्यालय में ‘गेटकीपर’ की अहम भूमिका निभाने वाला बताते हैं। यह भूमिका कुछ हद तक वैसी मानी जाती है जैसी इस्लामी गणराज्य के संस्थापक रूहुल्लाह खामेनेई के दौर में उनके बेटे अहमद खुमैनी निभाते थे।
प्रतिबंध और विवाद
2019 में अमेरिका ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगाए थे। आरोप था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां उन्हें सौंप दी थीं और वे बिना सार्वजनिक जवाबदेही के प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। सुधारवादी नेताओं और विदेशी सरकारों ने उन पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और सख्त सुरक्षा कार्रवाइयों का समर्थन करने के आरोप लगाए हैं, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
वंशानुगत सत्ता पर उठे सवाल
ध्यान देने वाली बात यह है कि अली खामेनेई ने अपने संभावित उत्तराधिकारियों की सूची में तीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं का नाम बताया था, जिसमें उनके बेटे का नाम शामिल नहीं था। ऐसे में पिता से पुत्र को सत्ता सौंपा जाना ईरान के इस्लामी गणराज्य की उस मूल विचारधारा पर सवाल खड़े करता है, जो वंशानुगत शासन का विरोध करती रही है।
ईरान में यह सत्ता परिवर्तन आने वाले समय में देश की आंतरिक राजनीति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक दिशा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।