इंदौर की भाजपा पार्षद निशा देवलिया का चुनाव अब शून्य नहीं, हाईकोर्ट ने पलटा जिला कोर्ट का फैसला.
इंदौर। इंदौर के वार्ड 44 की पार्षद पद को लेकर चल रहे विवाद पर इंदौर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें निशा देवलिया का चुनाव शून्य घोषित कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी को विजेता घोषित करने के फैसले को भी पूरी तरह खारिज कर दिया।
उल्लेखनीय है कि तीन साल पहले इंदौर नगर निगम के वार्ड 44 से निशा देवलिया ने कांग्रेस उम्मीदवार नंदनी मिश्रा को चुनाव हराया था। मिश्रा ने जिला कोर्ट में चुनाव के दौरान संपत्ति के ब्यौरे को लेकर याचिका दायर कर निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की थी। यह कहा गया कि देवलिया ने चुनाव के नामांकन पत्र के साथ हलफनामे में अपनी आवासीय संपत्ति का जिक्र किया है, जबकि संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। इसके अलावा एक मकान का क्षेत्रफल भी कम बताया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि जिन तथ्यों को आधार बनाकर देवलिया का निर्वाचन शून्य घोषित किया गया। वे ठीक नहीं हैं। निशा पहले भी वार्ड 44 से पार्षद रह चुकी है। वे दूसरी बार चुनाव जीती थी, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद फिर उनकी पार्षदी बरकरार रहेगी।
संपत्ति की जानकारी को लेकर दायर थी याचिका
मामला छोटी खजरानी क्षेत्र स्थित निशा देवलिया के करीब 1600 वर्गफीट के भवन से जुड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशी का आरोप था कि यह मकान व्यावसायिक (कमर्शियल) उपयोग का है, लेकिन चुनावी शपथ-पत्र में इसे आवासीय दर्शाया गया। वहीं रजिस्ट्री में 1142 वर्गफीट के चद्दर वाले मकान का उल्लेख था, जबकि नगर निगम को 200 वर्गफीट आवासीय मकान का ही टैक्स चुकाया जा रहा था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव को अवैध बताते हुए कोर्ट की शरण ली थी।