देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष अजमेरा ने फिर किया फर्जीवाड़ा, बिना संचालक मंडल की सहमति के सहकारिता विभाग में दे आए सूची.
इंदौर। सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन की सख्ती के बाद भी देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा और उपाध्यक्ष मनोज काला फर्जीवाड़े से बाज नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बुधवार को वे सहकारिता विभाग में पात्र सदस्यों की सूची सौंप आए। जो सूची उन्होंने सौंपी है, उसपर संचालक मंडल के अधिकांश सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं। न तो इसके लिए संचालक मंडल की बैठक बुलाई गई और न ही संचालकों से इस सूची पर सहमति ली गई है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने विमल अजमेरा को पात्र सदस्यों की सूची पिछले साल ही भेज दी थी। अजमेरा और उनके संचालक मंडल को इसे वेरिफाई कर विभाग में भेजना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा, लेकिन अजमेरा अपने खास लोगों के प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की सिफारिश करते रहे। इसके बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने 22 जून को एक बैठक बुलाकर अजमेरा को जमकर फटकार लगाते हुए 15 दिन में सूची वेरिफाई कर नहीं भेजने पर एफआईआर की चेतावनी दी थी।
अपात्र सदस्यों से ही तैयार करवा ली सूची
सूत्र बताते हैं कि देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा और उपाध्यक्ष मनोज काला सूची के मामले में लगातार फर्जीवाड़ा करते आ रहे हैं। सहकारिता विभाग और प्रशासन के दबाव के बाद जो सूची उन्होंने आज सौंपी है, उसके लिए संचालक मंडल की कोई बैठक नहीं हुई। यह सूची भी उन्होंने संस्था के ऑफिस की बजाए कहीं और तैयार करवाई है और खास बात यह कि इसमें संचालक मंडल का कोई योगदान नहीं है। यह सूची अजमेरा के चहेते कुछ अपात्र सदस्यों ने तैयार की है। बताया जाता है कि सहकारिता विभाग द्वारा भेजी सूची को दरकिनार करते हुए 25 साल पुरानी रजिस्ट्रियों को मान्य कर दिया गया है। जबकि यह सारी रजिस्ट्रियां अपात्र सदस्यों की हैं। सूत्र बताते हैं कि इस सूची पर संचालक मंडल के हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
कलेक्टर ने दी थी आखिरी चेतावनी
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले दिनों हुई बैठक में देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा को अंतिम चेतावनी दी थी। कलेक्टर ने कहा था कि हमने जो आपकी लिस्ट भेजी है उसके आधार पर लिस्ट बनाने को कहा है। 15 दिन में दे रहे हो कि कौन पात्र है। अगर नहीं देते तब मैं समझ लूंगा कि आप लोग नहीं करना चाहते। तब मैं कार्रवाई करूंगा। यह कार्रवाई सिर्फ सोसायटी एक्ट के तहत नहीं होगी, दूसरे तरीके के एफआईआर भी मैं करूंगा। इसके बाद भी अजमेरा और काला फर्जीवाड़े करने से बाज नहीं आ रहे।