मिडिल ईस्ट में जंग का आठवां दिन: ईरान-इजरायल में मिसाइलों की बारिश
मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव का आज आठवां दिन है। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी हालात शांत होने के बजाय और गंभीर होते जा रहे हैं। तेहरान से लेकर तेल अवीव तक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने भी गहरी चिंता जताते हुए तत्काल कूटनीतिक समाधान की अपील की है।
तेहरान एयरपोर्ट पर धमाके
ईरान की राजधानी में स्थित मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर शनिवार तड़के जोरदार धमाके हुए। स्थानीय मीडिया के अनुसार धमाके इतने तेज थे कि आसपास की कई इमारतों की खिड़कियां तक हिल गईं।
अमेरिका की सैन्य तैनाती बढ़ी
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश तैनात करने का फैसला किया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
खाड़ी देशों में भी हमलों की गूंज
- मनामा और यरुशलम में भी तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
- दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास मिसाइल का मलबा गिरने से उड़ानों पर असर पड़ा।
- ईरान ने बहरीन के औद्योगिक क्षेत्र की एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया, हालांकि आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
- संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया कि उसने 120 से अधिक ड्रोन और कई मिसाइलों को मार गिराया।
- दोहा में भी ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया गया।
अमेरिका और इजरायल के दावे
अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इजरायली सेना का दावा है कि उसने ईरान की लगभग 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है।
अमेरिका के अनुसार जंग शुरू होने के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 83 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले 72 घंटों में लगभग 200 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
लेबनान में भी हमले
इजरायली सेना ने बताया कि उसने बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में कमांड सेंटर, बहुमंजिला इमारतें और ड्रोन ठिकाने निशाना बने।
अमेरिकी नागरिकों की निकासी
करीब 20,000 अमेरिकी नागरिक मध्य पूर्व छोड़ चुके हैं, जबकि बाकी लोगों को निकालने के लिए सरकार चार्टर उड़ानों की व्यवस्था कर रही है।
तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।
मिडिल ईस्ट में जंग का आठवां दिन: ईरान-इजरायल में मिसाइलों की बारिश
मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव का आज आठवां दिन है। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी हालात शांत होने के बजाय और गंभीर होते जा रहे हैं। तेहरान से लेकर तेल अवीव तक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने भी गहरी चिंता जताते हुए तत्काल कूटनीतिक समाधान की अपील की है।
तेहरान एयरपोर्ट पर धमाके
ईरान की राजधानी में स्थित मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर शनिवार तड़के जोरदार धमाके हुए। स्थानीय मीडिया के अनुसार धमाके इतने तेज थे कि आसपास की कई इमारतों की खिड़कियां तक हिल गईं।
अमेरिका की सैन्य तैनाती बढ़ी
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश तैनात करने का फैसला किया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
खाड़ी देशों में भी हमलों की गूंज
मनामा और यरुशलम में भी तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास मिसाइल का मलबा गिरने से उड़ानों पर असर पड़ा।
ईरान ने बहरीन के औद्योगिक क्षेत्र की एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया, हालांकि आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया कि उसने 120 से अधिक ड्रोन और कई मिसाइलों को मार गिराया।
दोहा में भी ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया गया।
अमेरिका और इजरायल के दावे
अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इजरायली सेना का दावा है कि उसने ईरान की लगभग 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है।
अमेरिका के अनुसार जंग शुरू होने के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 83 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले 72 घंटों में लगभग 200 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
लेबनान में भी हमले
इजरायली सेना ने बताया कि उसने बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में कमांड सेंटर, बहुमंजिला इमारतें और ड्रोन ठिकाने निशाना बने।
अमेरिकी नागरिकों की निकासी
करीब 20,000 अमेरिकी नागरिक मध्य पूर्व छोड़ चुके हैं, जबकि बाकी लोगों को निकालने के लिए सरकार चार्टर उड़ानों की व्यवस्था कर रही है।
तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।