इन दिनों शहर में ‘दादा दयालु प्रीमियर लीग’ की चर्चा, आखिर इस आयोजन में क्यों खिंचे चले जा रहे भाजपा के सारे दिग्गज.
इंदौर। शहर और यहां के राजनीतिक गलियारों में खालसा स्टेडियम में आयोजित ‘दादा दयालु प्रीमियर लीग’ की चर्चा है। वैसे तो इसका आयोजन एमपी स्पोर्ट्स केयर ने किया है और इसका नाम भी अंतरराष्ट्रीय टेनिस क्रिकेट टूर्नामेंट है, लेकिन इसके असली नाम से कोई नहीं जानता। इस आयोजन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से लेकर कई दिग्गज नेता हर दिन शामिल रहे हैं। सब आश्चर्य में हैं कि आखिर यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है, फिर भी पूरी भाजपा क्यों टूट पड़ी है।
दरअसल इस आयोजन के पीछे दादा दयालु यानी सर्वाधिक मतों से जीतकर लोगों के दिलों पर लगातार राज करने वाले विधायक रमेश मेंदोला हैं। अब भला जिस आयोजन से दादा जुड़े हों उससे कोई परहेज क्यों करे। वह भी तब जब दादा ने अपना पूरा कायाकल्प ही कर लिया हो। अब न काया से और न स्वभाव से दादा, पुराने वाला दादा नजर आ रहे हैं।
दादा के कायाकल्प की भाजपा में चर्चा
दादा के इस कायाकल्प की चर्चा पूरी भाजपा में है। जिस तरह मंत्री पद नहीं मिलने पर भी उन्होंने संतोष कर लिया, वैसे ही अब हर काम में संतुष्टि का भाव रखने लगे हैं। अगर कोई काम नहीं हो रहा है या किसी ने इंकार कर दिया तब भी दादा के न तो चेहरे का भाव बदलता है न बातचीत का अंदाज। सिर्फ अनुरोध भरा स्वर ही सामने आता है। लोग तो यह भी कहने लगे हैं कि दादा अब सचमुच दयालु वाली भूमिका में आ गए हैं।
खेमे में रहकर भी बनाई अलग पहचान
दादा को वैसे तो दो नंबर के खेमे का माना जाता है, लेकिन उनका स्वभाव ऐसा कि दो नंबर से नफरत करने वाले भी दादा के साथ हैं। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि दादा ने कभी भी इंदौर में वर्चस्व की राजनीति नहीं की। किसी दूसरे के क्षेत्र में झांकने की उनकी आदत नहीं है। उन्होंने एक गुट, एक खेमे के साथ रहने के बावजूद अपनी ही लाइन लंबी की है। इसी का नतीजा है कि आज इंदौर भाजपा में वे सर्वाधिक कार्यकर्ता वाले नेता हैं।
विवादों से खुद को बचाकर रखा
दादा दयालु की खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को विवादों से बचाकर रखा। नए कलेवर में तो और भी ज्यादा विवादों से दूर रहते हैं। राजनीतिक विवाद हो या कोई और मुद्दा, दादा तुरंत दूरी बना लेते हैं। वैसे दादा हैं तो सीएम डॉ.मोहन यादव के खास, लेकिन प्रशासन और राजनीति में कभी जताने की कोशिश नहीं करते।
दे दनादन से निवेदन तक
पहले अधिकारी दादा से डरते थे कि कहीं काम न किया तो दे दनादन न शुरू हो जाए। डर के मारे हर काम हो जाता था, लेकिन अब माहौल ही बदल गया है। अगर कोई अधिकारी काम नहीं करता तो दादा फिर से उससे निवेदन करते हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी भी ये पूछने लगे हैं कि आखिर दादा को हुआ क्या है?
पोहा दिवस पर भी छाए रहे
हाल ही में विश्व पोहा दिवस मनाया गया। इसमें दादा दयालु भी सबको पोहा खिलाते नजर आए। इसकी भी राजनीति में खूब चर्चा हुई कि आखिर दादा को हुआ क्या है, क्योंकि इससे पहले उन्हें इस रूप नहीं देखा जाता था। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर दादा की सक्रियता भी चर्चा का विषय है। पहले मीडिया से भी दूरी बनाकर चलने वाले दादा सोशल मीडिया पर हर दिन नजर आ रहे हैं।