महाराष्ट्र की सियासत में हलचल: उद्धव और राज ठाकरे के एकजुट होने की अटकलें तेज.
महाराष्ट्र की सियासत में हलचल: उद्धव और राज ठाकरे के एकजुट होने की अटकलें तेज
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। यह अटकलें तब और तेज हो गईं जब राज्य के कई इलाकों में दोनों नेताओं के एक होने की अपील वाले पोस्टर लगाए गए।

पोस्टरों से बढ़ी सियासी सरगर्मी
मुंबई, पुणे, ठाणे जैसे इलाकों में लगाए गए इन पोस्टरों में लिखा गया है —मराठी मानुष के लिए ठाकरे बंधु साथ आएं।"
इस सार्वजनिक अपील ने महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा में मोड़ दिया है।
सामना में भी उठा मुद्दा
उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में भी इस विषय को लेकर एक लेख प्रकाशित हुआ है। इस लेख में ठाकरे परिवार के भीतर पुराने संबंधों और साझा राजनीतिक विरासत का ज़िक्र करते हुए लिखा गया है कि मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए दोनों ठाकरे भाइयों को एकजुट होना चाहिए।"
राज-उद्धव की राहें क्यों हुई थीं जुदा?
गौरतलब है कि बाल ठाकरे के जीवनकाल में ही राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक दोनों भाइयों की राजनीतिक राहें अलग रही हैं। हालांकि कुछ मुद्दों पर समय-समय पर विचारधारा में समानता दिखाई देती रही है।
संभावित गठबंधन के मायने
अगर यह गठबंधन होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा समीकरण बन सकता है, खासकर मराठी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए। यह गठबंधन बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट के लिए एक चुनौती बन सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पोस्टर और सामना में आए लेख से साफ है कि माहौल तैयार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हो सकता है।