महाराष्ट्र सरकार ने रद्द किया हिंदी भाषा की अनिवार्यता का फैसला, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने की घोषणा, तीन भाषा नीति को लेकर बनाई कमेटी.
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को हिंदी भाषा की अनिवार्यता का फैसला रद्द कर दिया। इसके तहत सरकार ने इसी साल अप्रैल में कक्षा 1 से 5वीं तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। सरकार के इस आदेश के खिलाफ विपक्ष लगातार विरोध कर रहा था।
रविवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ एक प्रेस कान्फ्रेंस में इसका ऐलान किया है। सीएम ने कहा कि तीन भाषा नीति को लेकर शिक्षाविद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसके रिपोर्ट के बाद ही हिंदी की भूमिका पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फडणवीस ने पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएण रहते उद्धव ठाकरे ने कक्षा 1 से 12 तक तीन भाषा नीति शुरू करने के लिए डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों को स्वीकारा था। साथ ही नीति लागू करने पर समिति गठित की थी।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल 16 अप्रैल में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया था। कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। विरोध के बाद 17 जून को संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें हिंदी को ऑप्शनल बनाया गया। इसके बाद इस मुद्दे पर जमकर विवाद चल रहा था। महाराष्ट्र कैबिनेट में शिवसेना के मंत्री गुलाबराव पाटील, संभुराज देसाई और दादा भुसे ने हिंदी भाषा अनिवार्यता का आदेश रद्द करने की मांग की थी।
फडणवीस ने विपक्ष पर साधा निशाना
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर विवाद पैदा करने के लिए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मराठी के संदर्भ में जो सो रहे हैं उन्हें उठाया जा सकता है, लेकिन जो दिखावा कर रहे हैं, उन्हें नहीं। कर्नाटक और यूपी जैसे राज्यों ने अपनी शैक्षणिक नीति लागू कर दी है। 16 अक्टूबर 2020 को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एक जीआर (सरकारी आदेश) जारी किया गया था। इसके तहत रघुनाथ माशेलकर की अध्यक्षता में 18 सदस्यों की एक समिति गठित की गई थी। इस समिति में थोरात, येवले, राजन वेळुकर, सपकाळ, जी. डी. जाधव, विजय पाटील, नितीन पुजार, अभय वाघ, निरंजन हिरानंदानी, भारत आहुजा, देविदास गोल्लर, मिलिंद साटम, अजित जोशी, विजय कदम (शिवसेना उद्धव गुट के उपनेता), धनराज माने आदि शामिल थे। यह एक मराठी और शिक्षाविदों की विशेषज्ञ समिति थी। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने 101 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में उनकी तस्वीर भी है, संपादक भी उपस्थित थे, हालांकि वे पीछे खड़े हैं। मैं खबरों में नहीं जाता, मैं रिपोर्ट की बात करता हूं। रिपोर्ट के पृष्ठ क्रमांक 56 पर यह अनुशंसा दी गई है कि एक उपसमूह बनाया गया था, जिसमें सुखदेव थोरात, नागनाथ कोतापल्ली, विजय कदम भी शामिल थे। उन्होंने सिफारिश की थी कि अंग्रेजी और हिंदी भाषा पहली से बारहवीं तक पढ़ाई जाए। मराठी को प्राथमिकता देना जरूरी बताया गया, लेकिन हिंदी का उल्लेख भी किया गया।
उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल ने किए थे हस्ताक्षर
फडणवीस ने कहा कि शिवसेना (उद्धव गुट) के उपनेता भी उस समिति में थे और उन्होंने ही यह अनुशंसा की थी। 14 सितंबर 2021 को यह रिपोर्ट सौंपी गई थी। 7 जनवरी 2022 को यह रिपोर्ट कैबिनेट में प्रस्तुत की गई। उद्धव ठाकरे की कैबिनेट ने इस पर हस्ताक्षर किए. इसलिए यह कहना गलत है कि उस रिपोर्ट को स्वीकार करते समय त्रिभाषा सूत्र मान्य नहीं किया गया था।