मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी ने की हाई लेवल मीटिंग, विशेष समूह बनाने का फैसला, ईंधन आपूर्ति के लिए अन्य स्रोत तैयार करने के निर्देश.
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट संकट पर रविवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक हुई। इसमें संकट से निपटने के लिए विशेष समूह बनाने का फैसला लिया गया। इस बैठक में तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को सुरक्षित रखने पर खास जोर दिया गया।
बताया जाता है कि करीब साढ़े तीन घंटे चली इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक सेक्टर की स्थिति की समीक्षा की। सरकार का मुख्य फोकस यह रहा कि देश में किसी भी तरह की सप्लाई बाधित न हो। इसके लिए लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने, वितरण व्यवस्था सुधारने और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी।
मंत्रियों और सचिवों का विशेष समूह
बैठक में मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाने का फैसला लिया गया, जो इस संकट से निपटने के लिए लगातार काम करेगा। साथ ही केमिकल, फार्मा, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी आयात के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पर जोर दिया गया। सरकार ने माना कि यह संकट सिर्फ तुरंत नहीं बल्कि मध्यम और लंबे समय तक असर डाल सकता है, इसलिए व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कई मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए। कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और सरकारी उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी हुई चर्चा
बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता जताई गई, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार ने साफ किया कि वह हालात पर लगातार नजर रख रही है और हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है। सरकार ने कहा कि तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। भंडार को मजबूत किया जा रहा है, सप्लाई चेन को सुरक्षित किया जा रहा है और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है।
कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के निर्देश
बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार के सभी अंग सही नजरिया अपनाकर नागरिकों को इस संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखें। बैठक में भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर चर्चा हुई। किसानों के लिए खरीफ सीजन के लिए खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया। पीएम ने आश्वस्त किया कि पिछले सालों में बनाए गए स्टॉक के कारण खाद की कोई कमी नहीं होगी। भविष्य के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा देश के सभी पावर प्लांटों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया, ताकि देश में बिजली की कोई किल्लत न हो। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय के निर्देश दिए हैं ताकि युद्ध की आड़ में जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो सके।