सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा-पश्चिम बंगाल में हमारे अधिकारियों को धमकाया गया, सीएम ने कार्रवाई में डाली रुकावट.
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर रेड मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अधिकारी ने ईडी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इस पर ईडी के वकील ने कहा कि वहां हमारे अधिकारियों को धमकाया गया। खुद सीएम ममता बनर्जी ने कार्रवाई में रुकावट डाली।
बुधवार को इस मामले में जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ईडी की याचिका पर सुनवाई की। ईडी ने इस याचिका में आरोप लगाया है कि जांच के दौरान बंगाल की सीएम ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ जांच वाली जगह पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अधिकारी के लिए पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने ईडी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इस पर ईडी के लिए पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि ईडी को हथियार नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि उसे डराया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई होली के बाद के लिए टाल दी और 18 मार्च की तारीख दी।
ईडी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है। एजेंसी का आरोप है कि तलाशी अभियान के दौरान उसके वैधानिक कर्तव्यों में बाधा डाली गई। अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह 8 जनवरी 2026 को प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और बिधाननगर स्थित आईपैक कार्यालय इसलिए गई थीं क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल कांग्रेस का संवेदनशील राजनीतिक डेटा एक्सेस किया जा रहा है। हलफनामे में कहा गया है कि यह डेटा आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा था।