ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद और हिंदू राष्ट्रवाद का जिक्र.
ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद और हिंदू राष्ट्रवाद का जिक्र
लीक रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्वीप के दो कट्टरवादों पर फोकस
ब्रिटिश सरकार की एक लीक रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े दो प्रकार के कट्टरवाद—खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद और हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ा कट्टरपंथ—को समझने लायक खतरा बताया गया है। यह रिपोर्ट ब्रिटिश थिंक टैंक ‘पॉलिसी एक्सचेंज’ के लिए एंड्रयू गिलिगन और डॉ. पॉल स्कॉट द्वारा तैयार की गई थी।

ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के गृह कार्यालय सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि लीक हुई रिपोर्ट का कौन सा संस्करण सामने आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के दावे सरकार की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

रिपोर्ट में सूचीबद्ध नौ प्रकार के कट्टरवाद
लीक रिपोर्ट में नौ प्रकार के कट्टरवाद को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
-
इस्लामवादी कट्टरवाद
-
दक्षिणपंथी कट्टरवाद
-
खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद
-
हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ा कट्टरपंथ
-
वामपंथी कट्टरवाद
... (अन्य प्रकारों का विवरण रिपोर्ट में विस्तृत है)
भारत पर लगाए गए आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की विदेशी भूमिकाओं को लेकर चिंताएं हैं। इसमें कनाडा और अमेरिका में सिखों के खिलाफ घातक हिंसा में भारत की संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है।
पहली बार हिंदू राष्ट्रवाद का उल्लेख
इससे पहले, 2023 के इंडिपेंडेंट रिव्यू ऑफ प्रिवेंट में हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़े कट्टरपंथ का उल्लेख नहीं किया गया था। इसे एक गलती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि अब इसे संभावित खतरे के रूप में पहचाना गया है।
ब्रिटिश संसद में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का सवाल
लीक रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने संसद में सवाल उठाए। शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिल्प ने कट्टरपंथ से निपटने के लिए सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल खड़े किए।
ब्रिटिश सरकार का रुख
ब्रिटिश सरकार के मंत्री डैन जार्विस ने कहा,
"कट्टरपंथ हमारे सामने सबसे बड़ा खतरा है। कट्टरपंथियों और आतंकवाद का मुकाबला करना हमारा मुख्य उद्देश्य है।"
भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस रिपोर्ट के लीक होने के बाद भारत सरकार या भारतीय राजनीतिक दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद और हिंदू राष्ट्रवाद का जिक्र
लीक रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्वीप के दो कट्टरवादों पर फोकस
ब्रिटिश सरकार की एक लीक रिपोर्ट में भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े दो प्रकार के कट्टरवाद—खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद और हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ा कट्टरपंथ—को समझने लायक खतरा बताया गया है। यह रिपोर्ट ब्रिटिश थिंक टैंक ‘पॉलिसी एक्सचेंज’ के लिए एंड्रयू गिलिगन और डॉ. पॉल स्कॉट द्वारा तैयार की गई थी।
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के गृह कार्यालय सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि लीक हुई रिपोर्ट का कौन सा संस्करण सामने आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के दावे सरकार की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
रिपोर्ट में सूचीबद्ध नौ प्रकार के कट्टरवाद
लीक रिपोर्ट में नौ प्रकार के कट्टरवाद को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
इस्लामवादी कट्टरवाद
दक्षिणपंथी कट्टरवाद
खालिस्तान समर्थक कट्टरवाद
हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ा कट्टरपंथ
वामपंथी कट्टरवाद
... (अन्य प्रकारों का विवरण रिपोर्ट में विस्तृत है)
भारत पर लगाए गए आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की विदेशी भूमिकाओं को लेकर चिंताएं हैं। इसमें कनाडा और अमेरिका में सिखों के खिलाफ घातक हिंसा में भारत की संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है।
पहली बार हिंदू राष्ट्रवाद का उल्लेख
इससे पहले, 2023 के इंडिपेंडेंट रिव्यू ऑफ प्रिवेंट में हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़े कट्टरपंथ का उल्लेख नहीं किया गया था। इसे एक गलती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि अब इसे संभावित खतरे के रूप में पहचाना गया है।
ब्रिटिश संसद में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का सवाल
लीक रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने संसद में सवाल उठाए। शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिल्प ने कट्टरपंथ से निपटने के लिए सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल खड़े किए।
ब्रिटिश सरकार का रुख
ब्रिटिश सरकार के मंत्री डैन जार्विस ने कहा,
"कट्टरपंथ हमारे सामने सबसे बड़ा खतरा है। कट्टरपंथियों और आतंकवाद का मुकाबला करना हमारा मुख्य उद्देश्य है।"
भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस रिपोर्ट के लीक होने के बाद भारत सरकार या भारतीय राजनीतिक दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।