गांधी नगर गृह निर्माण संस्था में उप अंकेक्षक आशीष सेठिया और प्रबंधक फूलचंद पांडे को बचाने में जुटे सहकारिता उपायुक्त, लोकायुक्त के पत्रों का भी नहीं दे रहे जवाब.
इंदौर। गांधी नगर गृह निर्माण संस्था में फर्जीवाड़ा कर खुला घूम रहे पूर्व उपायुक्त मदन गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया तथा संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय पर वर्तमान उपायुक्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जबकि इन तीनों को जांच में दोषी पाया जा चुका है और वरिष्ठ अधिकारी इन तीनों पर कार्रवाई का लिख चुके हैं। विडंबना यह है कि लोकायुक्त द्वारा बार-बार प्रतिवेदन भेजने के बाद भी उपायुक्त उसका जवाब नहीं भेज रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में कार्रवाई के निर्देश के बाद भी तत्कालीन सहकारिता उपायुक्त मदन गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया ने पांच साल तक कार्रवाई टाली। लोकायुक्त में शिकायत के बाद अब संयुक्त आयुक्त सहकारिता इंदौर संभाग बी.एल. मकवाना ने आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्यप्रदेश को गजभिये, सेठिया और गांधी नगर संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय पर कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा था। उपायुक्त यह प्रतिवेदन तो दबाकर बैठ ही गए, लोकायुक्त द्वारा भेजे पत्रों का जवाब भी नहीं दे रहे।
संयुक्त आयुक्त ने उपायुक्त को भेजा पत्र
लोकायुक्त के पत्रों का जवाब नहीं देने पर संयुक्त आयुक्त सहकारिता ने भोपाल से 20 नवंबर 25 को उपायुक्त को पत्र भेजा है। इसमें संयुक्त आयुक्त ने लिखा है कि गांधी नगर संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय तथा वर्तमान संचालक मंडल के दोषी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकायुक्त ने कारण बताओ नोटिस दिया था। इसके बारे में लोकायुक्त ने 1 सितंबर 25 तक जानकारी मांगी थी, लेकिन आपके द्वारा आज तक नहीं भेजा गया। संयुक्त आयुक्त ने उपायुक्त को अविलंब जानकारी भेजने के आदेश दिए।
2020 में हुई जांच में तीनों पाए गए थे दोषी
सहकारिता विभाग के तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जीएस परिहार ने गांधी नगर संस्था के मामले में धारा 59 का प्रतिवेदन 08 दिसंबर 2020 को उपायुक्त, सहकारिता को प्रस्तुत किया था। इसमें कई गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसमें यह भी कहा गया था कि संस्था का वर्तमान संचालक एवं प्रबंधक म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं संस्था की पंजीकृत उपविधियों के निर्देशों का पालन करने के लिए रजामंद नहीं है। पूर्व और वर्तमान संचालक मंडल ने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया है। इसके कारण संस्था में अनियमितताएं हैं, जिनका उचित निराकरण नहीं किया जा रहा है।
देरी के लिए गजभिये, सेठिया और पांडेय जिम्मेदार
जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि कार्यवाही में विलंब के कारणों की जांच की जाए। इस काम के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 13 जनवरी 2025 को एक प्रतिवेदन में एम.एल. गजभिये, तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर, आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक, इन्दौर एवं संस्था प्रबंधक फूलचंद पाण्डेय के उत्तरदायित्व के संबंध में तथ्य अंकित किए गए हैं। इसके साथ ही 07.08.2024, 14.10. 2024, 21.10.2024, 03.04.2025, 20.05.2025 को भेजे पत्र के माध्यम से कार्रवाई के निर्देश देने के बाद भी तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। प्रकरण में उत्तरदायी संस्था पदाधिकारियों संचालकों एवं संस्था कर्मचारियों के साथ विभागीय प्रशासक, परीक्षण अधिकारी के विरूद्ध भी कोई कार्यवाही नहीं करना दायित्व निर्वहन में चूक है। इसके लिए तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता एम.एल. गजभिये उत्तरदायी हैं।
सेठिया ने भाइयों को दिलाए थे प्लॉट
प्रतिवेदन के अनुसार संस्था के अभिलेख थाने में वर्ष 2013 से जमा हो गए थे। इसके बाद भी आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक के दोनों भाइयों को भूखंड की रसीदें जारी की गईं। इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई और नई रसीद बुक खरीद कर सेठिया के भाइयों को रसीदें जारी कर दी गईं। चूंकि आशीष सेठिया, कार्यालय उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर में पदस्थ होकर प्रकरण में तामिली प्रतिवेदन के परीक्षणकर्ता भी रहे हैं, अतः उक्त कार्य को पद के दुरूपयोग की श्रेणी के अंतर्गत माना जा सकता है।