नई दिल्ली में BRICS शेरपा बैठक की शुरुआत, भारत ने रखा लोग-केंद्रित’ विजन; पहली बार बेलारूस की एंट्री.
नई दिल्ली में BRICS शेरपा बैठक की शुरुआत, भारत ने रखा लोग-केंद्रित’ विजन; पहली बार बेलारूस की एंट्री
नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों की पहली शेरपा और सूस-शेरपा बैठक की शुरुआत हो गई है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी। बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव और ब्रिक्स शेरपा सुधाकर डलेला ने भारत की अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं को सामने रखा।
इस दौरान सुधाकर डलेला ने बताया कि प्रधानमंत्री के लोगों को केंद्र में रखने और मानवता की पहल के विजन से प्रेरित होकर भारत ब्रिक्स को आगे बढ़ाना चाहता है। भारत इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा है और इसका मुख्य विषय है—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।
इस बैठक की एक खास बात यह रही कि पहली बार ब्रिक्स के पार्टनर देश के रूप में बेलारूस ने भाग लिया। भारत में बेलारूस के राजदूत एम. कास्को अपने देश के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने आयोजकों का आभार जताया और कहा कि इससे पहले पार्टनर देशों को ऐसी बैठकों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला था।
बेलारूस के राजदूत ने अपने राष्ट्रपति का संदेश भी साझा किया, जिसमें कहा गया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का आने वाला साल नई उपलब्धियों और सफलताओं से भरा होगा। इससे ब्रिक्स दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय मंचों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
बेलारूस ने खुद को वैश्विक समुदाय का एक जिम्मेदार सदस्य बताते हुए कहा कि उसके पास तकनीक, खाद्य सुरक्षा और जल सुरक्षा के क्षेत्र में अहम अनुभव हैं, जिन्हें वह ब्रिक्स देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, ताकि सभी देशों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही बेलारूस ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में शामिल होने में भी रुचि जताई, जिससे ब्रिक्स देशों और पार्टनर देशों की आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग हो सके।
गौरतलब है कि वर्तमान में ब्रिक्स में दुनिया के 11 प्रमुख उभरते और विकासशील देश शामिल हैं—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। ब्रिक्स वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद और सहयोग का एक अहम मंच है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति व वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में इसकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।