अमेरिका ने भारत में मतदान जागरूकता के लिए दी जाने वाली 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग रोकी, बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने.
अमेरिका ने भारत में मतदान जागरूकता के लिए दी जाने वाली 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग रोकी, बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकार के 'डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी' (DOGE) ने भारत में मतदान जागरूकता बढ़ाने के लिए दी जाने वाली 21 मिलियन डॉलर (करीब 175 करोड़ रुपये) की फंडिंग को रद्द कर दिया है। इस फैसले की घोषणा टेक अरबपति एलन मस्क के नेतृत्व वाले विभाग ने की, जो अंतरराष्ट्रीय मदद बजट में कटौती का हिस्सा है।

DOGE का बयान
डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:अमेरिकी टैक्स देने वालों के पैसे इन चीजों पर खर्च किए जा रहे थे, जिन्हें अब रोक दिया गया है।"
इस सूची में भारत में वोटिंग जागरूकता अभियान के लिए दी जाने वाली फंडिंग का भी उल्लेख किया गया था।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे भारत की चुनाव प्रक्रिया में बाहरी दखल बताते हुए विपक्ष पर सवाल खड़े किए।
"भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग! यह निश्चित तौर पर बाहरी हस्तक्षेप है। इससे किसे फायदा हुआ? सत्तापक्ष को तो बिल्कुल नहीं।"
कांग्रेस ने किया पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि यदि यह विदेशी हस्तक्षेप था, तो 2014 में बीजेपी को इससे सबसे ज्यादा फायदा हुआ।
"अगर 2012 में चुनाव आयोग को कथित तौर पर यूएसएआईडी (USAID) के जरिए फंडिंग मिली थी और तब कांग्रेस सत्ता में थी, तो इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस खुद अपनी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही थी, और बीजेपी 2014 का चुनाव जीती।"
भारत में सियासी घमासान तेज
DOGE द्वारा फंडिंग रोकने की घोषणा के बाद भारत में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बीजेपी इसे चुनावी प्रक्रिया में विदेशी दखल करार दे रही है, जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी को ही इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बताया।
अब देखना होगा कि इस विवाद पर चुनाव आयोग या भारत सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
अमेरिका ने भारत में मतदान जागरूकता के लिए दी जाने वाली 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग रोकी, बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकार के 'डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी' (DOGE) ने भारत में मतदान जागरूकता बढ़ाने के लिए दी जाने वाली 21 मिलियन डॉलर (करीब 175 करोड़ रुपये) की फंडिंग को रद्द कर दिया है। इस फैसले की घोषणा टेक अरबपति एलन मस्क के नेतृत्व वाले विभाग ने की, जो अंतरराष्ट्रीय मदद बजट में कटौती का हिस्सा है।
DOGE का बयान
डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:अमेरिकी टैक्स देने वालों के पैसे इन चीजों पर खर्च किए जा रहे थे, जिन्हें अब रोक दिया गया है।"
इस सूची में भारत में वोटिंग जागरूकता अभियान के लिए दी जाने वाली फंडिंग का भी उल्लेख किया गया था।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे भारत की चुनाव प्रक्रिया में बाहरी दखल बताते हुए विपक्ष पर सवाल खड़े किए।
"भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग! यह निश्चित तौर पर बाहरी हस्तक्षेप है। इससे किसे फायदा हुआ? सत्तापक्ष को तो बिल्कुल नहीं।"
कांग्रेस ने किया पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि यदि यह विदेशी हस्तक्षेप था, तो 2014 में बीजेपी को इससे सबसे ज्यादा फायदा हुआ।
"अगर 2012 में चुनाव आयोग को कथित तौर पर यूएसएआईडी (USAID) के जरिए फंडिंग मिली थी और तब कांग्रेस सत्ता में थी, तो इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस खुद अपनी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही थी, और बीजेपी 2014 का चुनाव जीती।"
भारत में सियासी घमासान तेज
DOGE द्वारा फंडिंग रोकने की घोषणा के बाद भारत में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बीजेपी इसे चुनावी प्रक्रिया में विदेशी दखल करार दे रही है, जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी को ही इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बताया।
अब देखना होगा कि इस विवाद पर चुनाव आयोग या भारत सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।