शशि थरूर को लेकर कांग्रेस में मचा घमासान: उदित राज के तीखे हमले पर भाजपा का पलटवार.
शशि थरूर को लेकर कांग्रेस में मचा घमासान: उदित राज के तीखे हमले पर भाजपा का पलटवार
कांग्रेस पार्टी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, जब पार्टी के नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "भाजपा का सुपर प्रवक्ता" तक कह डाला। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बयान को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया।
उदित राज का आरोप: थरूर बन गए हैं भाजपा के प्रवक्ता
उदित राज ने शशि थरूर के पनामा में दिए गए भाषण को लेकर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा शशि थरूर भाजपा के प्रचार विभाग के प्रवक्ता बन गए हैं। वे ऐसी बातें कह रहे हैं जो भाजपा नेता भी नहीं कह रहे। उन्होंने पीएम मोदी और केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए सशस्त्र बलों की उपलब्धियों का श्रेय मौजूदा सरकार को दिया।"
उदित राज ने यह भी कहा कि क्या थरूर को पता है कि पिछली सरकारों ने क्या किया है? 1965 में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी, 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए गए थे। यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी सर्जिकल स्ट्राइक हुईं, लेकिन ढिंढोरा नहीं पीटा गया।"
उन्होंने शशि थरूर पर पार्टी के प्रति "बेईमानी" का आरोप भी लगाया।
भाजपा का पलटवार: थरूर पर हमला राहुल गांधी के इशारे पर
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने उदित राज के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा यह हमला कांग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी के इशारे पर हुआ है क्योंकि शशि थरूर ने राष्ट्रहित को पार्टी लाइन से ऊपर रखा। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जब शशि थरूर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए विदेश में बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, तब कांग्रेस अपने ही नेता पर निशाना साध रही है। उन्होंने कहा कांग्रेस पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलेगी लेकिन अपने ही नेता पर मिसाइल दागने में पीछे नहीं हटेगी।"
शशि थरूर का भाषण: आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में बदलाव का ज़िक्र
शशि थरूर ने पनामा में दिए अपने भाषण में कहा अब आतंकियों को यह अहसास हो गया है कि भारत में हमलों की उन्हें कीमत चुकानी होगी। भारत सरकार की सोच में बदलाव आया है। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक इसका उदाहरण हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार भारत ने सीमा पार आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की है। कारगिल युद्ध के दौरान भी हमने सीमापार नहीं की थी, लेकिन अब हम अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पार कर चुके हैं।"
निष्कर्ष
शशि थरूर की राष्ट्रहित में की गई टिप्पणी जहां भाजपा की सराहना पा रही है, वहीं कांग्रेस के भीतर विरोध का कारण बन रही है। यह प्रकरण न केवल कांग्रेस के अंदर विचारधारात्मक मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए बयानों की आंतरिक राजनीति में कितनी गूंज हो सकती है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।