आखिर भागीरथपुरा की कौन सी ‘स्वच्छता’ को देखकर दिया गया था अवॉर्ड, अफसर तो ‘निकम्मे’ निकले, आप तो ‘पाक-साफ’ हो नेताजी!.
इंदौर। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा एक के भागीरथपुरा ने इंदौर का नाम पूरे देश में डूबा दिया है। देश के लोग इंदौर को स्वच्छता में लगातार आठ बार नंबर वन आने पर भी शंका जाहिर कर रहे हैं। अब एक नए खुलासे ने लोगों की शंका और बढ़ा दी है। लोग कह रहे हैं कि जिस भागीरथपुरा को महापौर ने स्वच्छता में नंबर वन वार्ड का अवॉर्ड दिया था, उसकी ऐसी हालत कैसे हो गई?
फिलहाल भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। भोपाल से बड़े-बड़े अफसर इस मामले में मातमपूर्सी करने में जुटे हैं। दौरे किए जा रहे हैं। बैठकें हौ रही हैं, योजनाएं बन रही हैं। पूरे प्रदेश में शुद्ध जल अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जो दिन रात गलियों में घूमते हैं, जो जनता के दरवाजे पर जाकर वोट मांगते हैं, उनका कोई दोष नहीं निकला। उन्हें न तो ग्लानी है और न वे खुद को जिम्मेदार मान रहे हैं। सारा दोष अफसरों का है। इसलिए अफसरों पर कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन नेताजी पर हाथ कौन डाले। वे आज भी शान से गले में दुप्पटा डाले घूम रहे हैं।
क्या कोई बताएगा कैसे सबसे स्वच्छ था भागीरथपुरा
जिस भागीरथपुरा के कारण पूरे देश में इंदौर की साख पर सवाल उठ रहे हैं, आखिर उसे 2023 में सबसे स्वच्छ वार्ड का अवॉर्ड किसने दिया? किसने यह तय किया? बताया जाता है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने वहां के पार्षद कम वाघेला को प्रशंसा पत्र देते हुए उन्हें सम्मानित भी किया था। इसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें महापौर भागीरथपुरा को इंदौर का सबसे अच्छा और स्वच्छ वार्ड बताते नजर आ रहे हैं। इस दौरान मंच पर पार्षद कमल वाघेला भी मौजूद थे। महापौर ने मंच से भागीरथपुरा के विकास कार्यों की जमकर तारीफ की और अन्य वार्डों के पार्षदों को यहां आकर काम देखने की सलाह दी थी। महापौर ने कहा था कि जिन वार्डों में बस्तियां हैं, उनके पार्षदों को भागीरथपुरा आकर काम देखना चाहिए।
जनता का सवाल-क्या सिर्फ अफसर ही हैं दोषी
आप सबने मिलकर अफसरों पर इस पूरे मामले का ठीकरा फोड़ा। सीएम की बैठक तक में अफसरों की शिकायत की। नगरीय प्रशासन मंत्री से महापौर तक ने अफसरों पर अपनी खीज निकाली। सीएम ने आपके कहने पर अफसरों के ट्रांसफर कर दिए, कुछ को निलंबित भी होना पड़ा। जनता यह पूछ रही है कि उसने आपको वोट दिया। जब भी आपको जरूरत पड़ी, झंडा और बैनर उठाकर आपकी रैलियों में भी आए। आपके पार्षद से लेकर भाजपा के कार्यकर्ता तक उन बस्तियों में जाते रहे, लोग यह कैसे मान लें कि इस पूरी घटना में आप में से किसी की लापरवाही नहीं है। अफसर सदा से ही आपकी सुनते रहे हैं और राज्य सरकार द्वारा उनको आपकी बात सुनने के लिए ही भेजा जाता है। फिर आप इस घटना के लिए जिम्मेदार क्यों नहीं?
भाजपा के संगठन का नेटवर्क कहां गया?
भाजपा एक कैडर वाली पार्टी है। आरएसएस के कार्यकर्ता भी बस्तियों में दिन-रात सक्रिय रहते हैं। बूथ स्तर पर भी भाजपा काफी मजबूत है। अपने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का भी दावा है कि उनकी पकड़ बूथ स्तर पर मजबूत है। क्या उनके किसी कार्यकर्ता ने कभी भागीरथपुरा का हाल नहीं बताया। क्या भागीरथपुरा के कार्यकर्ताओं से सिर्फ वोटों का ही गुणा-भाग पूछा जाता था? क्या किसी कार्यकर्ता ने कभी वहां की समस्या नहीं बताई या फिर आपने पूछा नहीं?
संगठन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
पूरे देश में भाजपा की सरकार, भाजपा की नगर निगम की बदनामी होने के बाद भी संगठन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश संगठन महामंत्री ने बंद कमरे में भले ही डांट दिया हो, लेकिन जनता तक संदेश नहीं पहुंचा। संघ कार्यालय में भले ही कलेक्टर और महापौर को बुला लिया गया हो, लेकिन हुआ क्या? जिस जनता के दम पर भाजपा आज इंदौर की 9 विधानसभा सीटों पर कब्जा कर बैठी है, क्या वह फिर आपके कहने पर ऐसे ही नेताओं को अपना जनप्रतिनिधि चुनेगी? अरे, अफसरों को हटाने वाले जिम्मेदारों, कुछ एक्शन अपने नेताओं पर भी ले लेते।