नेपाल में राजशाही बहाली को लेकर हिंसक प्रदर्शन, पूर्व पीएम ने लगाया राजा ज्ञानेंद्र शाह पर आरोप.
नेपाल में राजशाही बहाली को लेकर हिंसक प्रदर्शन, पूर्व पीएम ने लगाया राजा ज्ञानेंद्र शाह पर आरोप
हिंसक प्रदर्शनों में दो की मौत, कर्फ्यू और सेना की तैनाती
नेपाल में राजशाही बहाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार शामिल हैं। हालात बेकाबू होने के कारण हिंसा प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा और सेना की तैनाती करनी पड़ी।

पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल का आरोप
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा,यह स्पष्ट है कि इस हिंसा के पीछे ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है। सरकार को अब सख्त कदम उठाने चाहिए और जांच कर दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए।"
सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय पर हमला
पूर्व पीएम प्रचंड ने शनिवार को हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय पहुंचे, जिसे प्रदर्शनकारियों ने नुकसान पहुंचाया। उन्होंने सरकार से हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शनकारियों और नेताओं की गिरफ्तारी
हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक 51 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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17 प्रदर्शनकारियों को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया, जिनमें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के उपाध्यक्ष रबिंद्र मिश्रा, महासचिव धवल शमशेर राना, और कार्यकर्ता स्वागत नेपाल व संतोष तमांग शामिल हैं।
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कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया है।
राजशाही बहाली की मांग
नवराज सुवेदी के नेतृत्व में राज संस्था पुनर्स्थापना आंदोलन के कार्यकर्ता संवैधानिक राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
नेपाल में राजशाही का इतिहास
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2006: भारी विरोध के बाद राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।
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2008: 240 साल पुराना राजशाही शासन समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना हुई।
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सभी अधिकार संसद को सौंप दिए गए।
नेपाल में राजशाही समर्थक गुटों और राजनीतिक दलों के बीच यह तनाव सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
नेपाल में राजशाही बहाली को लेकर हिंसक प्रदर्शन, पूर्व पीएम ने लगाया राजा ज्ञानेंद्र शाह पर आरोप
हिंसक प्रदर्शनों में दो की मौत, कर्फ्यू और सेना की तैनाती
नेपाल में राजशाही बहाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार शामिल हैं। हालात बेकाबू होने के कारण हिंसा प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा और सेना की तैनाती करनी पड़ी।
पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल का आरोप
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा,यह स्पष्ट है कि इस हिंसा के पीछे ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है। सरकार को अब सख्त कदम उठाने चाहिए और जांच कर दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए।"
सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय पर हमला
पूर्व पीएम प्रचंड ने शनिवार को हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और सोशलिस्ट फ्रंट के कार्यालय पहुंचे, जिसे प्रदर्शनकारियों ने नुकसान पहुंचाया। उन्होंने सरकार से हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शनकारियों और नेताओं की गिरफ्तारी
हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक 51 लोगों को गिरफ्तार किया है।
17 प्रदर्शनकारियों को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया, जिनमें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के उपाध्यक्ष रबिंद्र मिश्रा, महासचिव धवल शमशेर राना, और कार्यकर्ता स्वागत नेपाल व संतोष तमांग शामिल हैं।
कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया है।
राजशाही बहाली की मांग
नवराज सुवेदी के नेतृत्व में राज संस्था पुनर्स्थापना आंदोलन के कार्यकर्ता संवैधानिक राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
नेपाल में राजशाही का इतिहास
2006: भारी विरोध के बाद राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।
2008: 240 साल पुराना राजशाही शासन समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना हुई।
सभी अधिकार संसद को सौंप दिए गए।
नेपाल में राजशाही समर्थक गुटों और राजनीतिक दलों के बीच यह तनाव सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।