समान नागरिक संहिता पर सियासत गरमाई: कांग्रेस ने विधि आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल.
समान नागरिक संहिता पर सियासत गरमाई: कांग्रेस ने विधि आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर विधि आयोग जैसे सम्मानित निकाय के साथ लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि 22वें विधि आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन समान नागरिक संहिता (UCC) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद UCC को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 22वें विधि आयोग ने UCC पर अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले ही अपना कार्यकाल समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 23वें विधि आयोग की घोषणा के बावजूद उसकी संरचना को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। रमेश ने कहा, "मोदी सरकार विधि आयोग जैसे प्रतिष्ठित निकाय के साथ लापरवाह क्यों है, खासतौर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर?"
जयराम रमेश ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस समय के आयोग ने समान नागरिक संहिता को "न तो आवश्यक और न ही वांछनीय" करार दिया था। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय संस्कृति की विविधता और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक थी।

उत्तराखंड में UCC लागू करने की तैयारी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि UCC को लेकर नियम तैयार कर लिए गए हैं और इसकी घोषणा जल्द की जाएगी। दिसंबर में धामी ने कहा था कि जनवरी में UCC लागू होगा। अटकलें हैं कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
राजनीतिक माहौल गरमाया
कांग्रेस ने UCC को लेकर केंद्र सरकार की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, धामी सरकार के ऐलान के बाद यह मुद्दा उत्तराखंड के नगर निगम चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों में प्रमुख बन गया है।समान नागरिक संहिता का मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है। अब यह देखना होगा कि सरकार और विपक्ष इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं।
समान नागरिक संहिता पर सियासत गरमाई: कांग्रेस ने विधि आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर विधि आयोग जैसे सम्मानित निकाय के साथ लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि 22वें विधि आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन समान नागरिक संहिता (UCC) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद UCC को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 22वें विधि आयोग ने UCC पर अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले ही अपना कार्यकाल समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 23वें विधि आयोग की घोषणा के बावजूद उसकी संरचना को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। रमेश ने कहा, "मोदी सरकार विधि आयोग जैसे प्रतिष्ठित निकाय के साथ लापरवाह क्यों है, खासतौर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर?"
जयराम रमेश ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस समय के आयोग ने समान नागरिक संहिता को "न तो आवश्यक और न ही वांछनीय" करार दिया था। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय संस्कृति की विविधता और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक थी।
उत्तराखंड में UCC लागू करने की तैयारी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि UCC को लेकर नियम तैयार कर लिए गए हैं और इसकी घोषणा जल्द की जाएगी। दिसंबर में धामी ने कहा था कि जनवरी में UCC लागू होगा। अटकलें हैं कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
राजनीतिक माहौल गरमाया
कांग्रेस ने UCC को लेकर केंद्र सरकार की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, धामी सरकार के ऐलान के बाद यह मुद्दा उत्तराखंड के नगर निगम चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों में प्रमुख बन गया है।समान नागरिक संहिता का मुद्दा न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है। अब यह देखना होगा कि सरकार और विपक्ष इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं।