केरल विधानसभा ने UGC दिशा-निर्देश 2025 के मसौदे पर किया विरोध, केंद्र से वापस लेने की मांग.
केरल विधानसभा ने UGC दिशा-निर्देश 2025 के मसौदे पर किया विरोध, केंद्र से वापस लेने की मांग
केरल विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार से यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) दिशा-निर्देश 2025 के मसौदे को वापस लेने और उसमें बदलाव करने की मांग की। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया कि यूजीसी का मसौदा संविधान की भावना को प्रतिबिंबित नहीं करता है।
मसौदे पर केरल का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि यह मसौदा राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने सभी हितधारकों से चर्चा किए बिना यह दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए मसौदे में कुलपतियों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मामलों में राज्य सरकारों की भूमिका को खत्म कर दिया गया है।

संघीय ढांचे और उच्च शिक्षा पर प्रभाव
विजयन ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में निजी क्षेत्र के लोगों को बिना अकादमिक विशेषज्ञता के कुलपति के पद पर नियुक्त करने की अनुमति दी जा सकती है, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र को व्यावसायीकरण और सांप्रदायिक ताकतों के नियंत्रण में ले जाएगा। उन्होंने कहा, "यह मसौदा संघीय ढांचे और लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।"
केंद्र और राज्यों के बीच टकराव
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों के पास विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके पर्यवेक्षण का अधिकार है, जबकि केंद्र का दायित्व केवल समन्वय और मानकों को तय करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन तथ्यों की अनदेखी कर रही है।
विधानसभा की अपील
केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि :
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यूजीसी 2025 के मसौदे को तुरंत वापस ले।
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राज्य सरकारों और अकादमिक विशेषज्ञों की चिंताओं को गंभीरता से सुने।
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नए दिशा-निर्देश जारी करने से पहले सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा करे।
राजनीतिक रणनीति और आगे का रास्ता
मुख्यमंत्री विजयन ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एकजुट करेंगे। केरल सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि यूजीसी दिशा-निर्देश 2025 का मसौदा केंद्र और राज्यों के बीच नए राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का केंद्र बन सकता है।
केरल विधानसभा ने UGC दिशा-निर्देश 2025 के मसौदे पर किया विरोध, केंद्र से वापस लेने की मांग
केरल विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार से यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) दिशा-निर्देश 2025 के मसौदे को वापस लेने और उसमें बदलाव करने की मांग की। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया कि यूजीसी का मसौदा संविधान की भावना को प्रतिबिंबित नहीं करता है।
मसौदे पर केरल का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि यह मसौदा राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने सभी हितधारकों से चर्चा किए बिना यह दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए मसौदे में कुलपतियों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मामलों में राज्य सरकारों की भूमिका को खत्म कर दिया गया है।
संघीय ढांचे और उच्च शिक्षा पर प्रभाव
विजयन ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में निजी क्षेत्र के लोगों को बिना अकादमिक विशेषज्ञता के कुलपति के पद पर नियुक्त करने की अनुमति दी जा सकती है, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र को व्यावसायीकरण और सांप्रदायिक ताकतों के नियंत्रण में ले जाएगा। उन्होंने कहा, "यह मसौदा संघीय ढांचे और लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।"
केंद्र और राज्यों के बीच टकराव
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों के पास विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके पर्यवेक्षण का अधिकार है, जबकि केंद्र का दायित्व केवल समन्वय और मानकों को तय करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन तथ्यों की अनदेखी कर रही है।
विधानसभा की अपील
केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि :
यूजीसी 2025 के मसौदे को तुरंत वापस ले।
राज्य सरकारों और अकादमिक विशेषज्ञों की चिंताओं को गंभीरता से सुने।
नए दिशा-निर्देश जारी करने से पहले सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा करे।
राजनीतिक रणनीति और आगे का रास्ता
मुख्यमंत्री विजयन ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एकजुट करेंगे। केरल सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि यूजीसी दिशा-निर्देश 2025 का मसौदा केंद्र और राज्यों के बीच नए राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का केंद्र बन सकता है।