मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी का काम तेज.
मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी का काम तेज
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने मणिपुर के तैंग्नोपॉल जिले के मोरेह कस्बे के पास भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज कर दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 398 किमी मणिपुर में आती है।

परियोजना का विवरण
यह परियोजना बीआरओ की विंग सेवक द्वारा संचालित है, जो नगालैंड और मणिपुर में सड़क निर्माण की देखरेख भी करती है। मोरेह के पास अब तक केवल 10 किमी की सीमा पर बाड़बंदी पूरी हुई है। यह इलाका हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कुख्यात है। परियोजना को 31,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाना है।
स्थानीय समुदाय का विरोध
सीमा पर बाड़बंदी को लेकर कुकी-जो समुदाय के नागरिक संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह उनके इलाकों को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले, नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की मणिपुर इकाई ने भी उन क्षेत्रों में बाड़बंदी का विरोध किया था, जहां नगा समुदाय के लोग बसे हुए हैं।
मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी का काम तेज
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने मणिपुर के तैंग्नोपॉल जिले के मोरेह कस्बे के पास भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज कर दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 398 किमी मणिपुर में आती है।
परियोजना का विवरण
यह परियोजना बीआरओ की विंग सेवक द्वारा संचालित है, जो नगालैंड और मणिपुर में सड़क निर्माण की देखरेख भी करती है। मोरेह के पास अब तक केवल 10 किमी की सीमा पर बाड़बंदी पूरी हुई है। यह इलाका हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कुख्यात है। परियोजना को 31,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाना है।
स्थानीय समुदाय का विरोध
सीमा पर बाड़बंदी को लेकर कुकी-जो समुदाय के नागरिक संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह उनके इलाकों को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले, नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की मणिपुर इकाई ने भी उन क्षेत्रों में बाड़बंदी का विरोध किया था, जहां नगा समुदाय के लोग बसे हुए हैं।