भारत में हर कोई जलवायु परिवर्तन से प्रभावित; डॉ स्वामीनाथन .
भारत में हर कोई जलवायु परिवर्तन से प्रभावित; डॉ स्वामीनाथन
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि भारत में लगभग हर कोई अब जलवायु परिवर्तन के खतरों से प्रभावित है। स्वामीनाथन ने महिलाओं और बच्चों को इन जलवायु-संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बताया।डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में व्यावहारिक रूप से हर कोई अब जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील है, चाहे बहुत ज्यादा गर्मी हो या फिर बैक्टीरिया या वायरस जनित बीमारियां। इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सभी के लिए स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच एक प्राथमिकता है साथ ही साफ पेयजल और बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत है।भारत में जलवायु परिवर्तन के असर से वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा है। साथ ही बाधित कृषि चक्रों से कुपोषण की समस्या भी पैदा हुई है। स्वामीनाथन ने कहा कि भारत की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अब इन जोखिमों के खतरे से जूझ रही है। देश के शहरों में अर्पयाप्त आवास और सफाई और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ और चरम मौसम के चलते खतरा बढ़ा है।
भारत में हर कोई जलवायु परिवर्तन से प्रभावित; डॉ स्वामीनाथन
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि भारत में लगभग हर कोई अब जलवायु परिवर्तन के खतरों से प्रभावित है। स्वामीनाथन ने महिलाओं और बच्चों को इन जलवायु-संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बताया।डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में व्यावहारिक रूप से हर कोई अब जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील है, चाहे बहुत ज्यादा गर्मी हो या फिर बैक्टीरिया या वायरस जनित बीमारियां। इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सभी के लिए स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच एक प्राथमिकता है साथ ही साफ पेयजल और बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत है।भारत में जलवायु परिवर्तन के असर से वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा है। साथ ही बाधित कृषि चक्रों से कुपोषण की समस्या भी पैदा हुई है। स्वामीनाथन ने कहा कि भारत की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अब इन जोखिमों के खतरे से जूझ रही है। देश के शहरों में अर्पयाप्त आवास और सफाई और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ और चरम मौसम के चलते खतरा बढ़ा है।