बिरसा मुंडा क्रिकेट लीग के बहाने भाजपा की जमीन मजबूत कर रहे डॉ.निशांत खरे, आदिवासी युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश.
इंदौर। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ.निशांत खरे आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्त पकड़ रखते हैं। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में भी उन्हें भाजपा के लिए कमजोर मानी जानी वाली आदिवासी सीटों की कमान सौंपी गई थी। इन दिनों डॉ.निशांत खरे द्वारा आयोजित बिरसा मुंडा क्रिकेट लीग की खूब चर्चा है। कहा जा रहा है कि इस आयोजन के माध्यम से डॉ.खरे भाजपा को आदिवासी युवाओं के करीब ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
बिरसा मुंडा क्रिकेट लीग में पूरे प्रदेश की टीमें शामिल हो रही हैं। लगभग सभी आदिवासी क्षेत्रों के युवा इसमें शामिल हो रहे हैं और सबमें जबरदस्त उत्साह भी देखा गया है। खुद डॉ.खरे इस आयोजन के लिए दिनरात लगे हुए हैं। इसमें हर दिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का आगमन भी हो रहा है। माना यह जा रहा है कि इस आयोजन के माध्यम से डॉ.खरे प्रदेश के आदिवासी इलाकों में भाजपा के लिए मजबूत जमीन तैयार कर रहे हैं।
क्रिकेट को बना दिया ‘भगोरिया’ जैसा त्योहार
जल्द ही होली आने वाली है। आदिवासी इलाकों में भगोरिया शुरू होने वाला है। इससे पहले ही डॉ.निशांत खरे ने आदिवासी युवाओं को इंदौर में भगोरिया जैसा माहौल उपलब्ध करा दिया। वहीं के वाद्य, वहीं के नृत्य और वहीं का संगीत। बिरसा मुंडा क्रिकेट लीग में जाकर आपको लगेगा कि आप किसी आदिवासी इलाके में आ गए हैं। क्रिकेट खेलने आए युवा अपने पारंपरिक लोक संस्कृति की में रंगे नजर आ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में संभाली थी कमान
डॉ. निशांत खरे की आदिवासी क्षेत्रों में अच्छी पकड़ देखते हुए ही भाजपा ने उन्हें विधानसभा चुनाव में इन इलाकों की कमान सौंपी थी। इसका प्रमुख कारण रहा कि वर्ष 2018 के चुनाव में इंदौर संभाग की 37 में से 11 सीट ही भाजपा ने जीती थी। अधिकांश आदिवासी सीटों पर पार्टी की हार हुई थी। इससे सबक लेते हुए भाजपा ने डॉ. निशांत खरे को इस काम में लगाया है। उन्होंने आदिवासी सीटों पर काम शुरू किया और इसका फायदा यह हुआ कि भाजपा को इन क्षेत्रों में उम्मीद से अधिक सफलता मिली।
चेहरे पर सिकन लाए बिना हमेशा जुटे रहे
कोरोना में डॉ.निशांत खरे की सक्रियता के बाद से ही यह चर्चा होने लगी थी कि अगले महापौर वही होंगे। संघ से लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं तक की मुहर लगने के बाद भी अंतिम समय में उनका नाम कट गया। इसके बावजूद वे चेहरे पर कोई सिकन लाए बिना मैदान संभाले रहे। यही वजह है कि भाजपा ने जब नई कार्यकारिणी का गठन किया तो उन्हें उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया।