80 साल बाद बदलेगा PMO का ठिकाना: ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे पीएम मोदी, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी को नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने जा रहे हैं। दारा शिकोह रोड पर बना यह अत्याधुनिक परिसर 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला है और इसे लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन करेंगे। इस नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ National Security Council सचिवालय और Cabinet Secretariat भी स्थित होंगे। पहले ये सभी कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर थे, लेकिन अब एक ही परिसर में होने से निर्णय प्रक्रिया और समन्वय अधिक प्रभावी होगा।
क्या है ‘सेवा तीर्थ’ की खासियत?
नया परिसर विजय चौक के पास बनाया गया है, जिससे प्रधानमंत्री की आवाजाही आसान होगी और आम लोगों को ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। इसमें तीन मुख्य इमारतें शामिल हैं:
- सेवा तीर्थ 1: प्रधानमंत्री कार्यालय
- सेवा तीर्थ 2: कैबिनेट सचिवालय
- सेवा तीर्थ 3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
यह परिसर पूरी तरह हाई-टेक सुविधाओं से लैस है। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल आर्काइव्स, पेपरलेस वर्क कल्चर और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम की व्यवस्था की गई है। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, मॉनिटरिंग नेटवर्क और एडवांस्ड एनर्जी रिस्पॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर से सुरक्षा और दक्षता को और मजबूत किया गया है।
साउथ ब्लॉक में ऐतिहासिक आखिरी बैठक
अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में स्थित था, जो पिछले 80 वर्षों से सत्ता का केंद्र रहा है। 15 अगस्त 1947 को इसी भवन में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में आखिरी और ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय औपचारिक रूप से ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो जाएगा — एक नए युग की शुरुआत के साथ।
80 साल बाद बदलेगा PMO का ठिकाना: ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे पीएम मोदी, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी को नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने जा रहे हैं। दारा शिकोह रोड पर बना यह अत्याधुनिक परिसर 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला है और इसे लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन करेंगे। इस नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ National Security Council सचिवालय और Cabinet Secretariat भी स्थित होंगे। पहले ये सभी कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर थे, लेकिन अब एक ही परिसर में होने से निर्णय प्रक्रिया और समन्वय अधिक प्रभावी होगा।
क्या है ‘सेवा तीर्थ’ की खासियत?
नया परिसर विजय चौक के पास बनाया गया है, जिससे प्रधानमंत्री की आवाजाही आसान होगी और आम लोगों को ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। इसमें तीन मुख्य इमारतें शामिल हैं:
सेवा तीर्थ 1: प्रधानमंत्री कार्यालय
सेवा तीर्थ 2: कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ 3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
यह परिसर पूरी तरह हाई-टेक सुविधाओं से लैस है। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल आर्काइव्स, पेपरलेस वर्क कल्चर और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम की व्यवस्था की गई है। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, मॉनिटरिंग नेटवर्क और एडवांस्ड एनर्जी रिस्पॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर से सुरक्षा और दक्षता को और मजबूत किया गया है।
साउथ ब्लॉक में ऐतिहासिक आखिरी बैठक
अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में स्थित था, जो पिछले 80 वर्षों से सत्ता का केंद्र रहा है। 15 अगस्त 1947 को इसी भवन में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में आखिरी और ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय औपचारिक रूप से ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो जाएगा — एक नए युग की शुरुआत के साथ।