छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, 29 नक्सलियों ने डाले हथियार, लगातार बढ़ रहे दबाव का दिख रहा है असर.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। लगातार बढ़ रहे दबाव और प्रभावी रणनीति के चलते 29 पुरुष नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सुकमा जिले में इससे पहले भी कई नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
गोगुंडा कैंप की स्थापना के बाद से ही इस इलाके में सुरक्षा बलों की उपस्थिति काफी बढ़ गई थी। इसके कारण नक्सलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाना संभव हुआ। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन, एरिया डॉमिनेशन और अन्य दबाव की रणनीतियों से प्रभावित होकर, इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया। यह दर्शाता है कि सरकार की नीतियां और सुरक्षा बलों का अथक प्रयास रंग ला रहा है। नर्वास नीति से मिली प्रेरणा
आत्मसमर्पण करने वाले सभी 29 नक्सलियों ने सुकमा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण चव्हाण के समक्ष अपना समर्पण किया। इस अवसर पर, पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस नीति के तहत नक्सलियों को समाज में पुनः स्थापित होने और बेहतर जीवन जीने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। इस जानकारी ने नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित किया।
9 जनवरी को 63 नक्सलियों ने डाले थे हथियार
इससे पहले 9 जनवरी को 63 नक्सलियों ने हथियार डाले थे। इन सभी पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 19 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती भी शामिल थे, जिन्होंने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें 18 महिला नक्सली भी शामिल थीं। इसी तरह 7 जनवरी को 7 महिलाएं समेत 26 खूंखार नक्सलियों ने किया था सरेंडर। इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसी तरह 3 जनवरी को बारसे देवा ने सरेंडर किया था।