पीओके में उथल-पुथल: पुलिस भी उतरी सड़कों पर, हिंसा में 3 की मौत, 22 घायल.
पीओके में उथल-पुथल: पुलिस भी उतरी सड़कों पर, हिंसा में 3 की मौत, 22 घायल
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अचानक बिगड़ गए, जब स्थानीय पुलिसकर्मी भी पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। अब तक हो रहे धरना-प्रदर्शन और हड़ताल को अवामी एक्शन कमेटी आगे बढ़ा रही थी, लेकिन पुलिस की नाराजगी ने आंदोलन को और तेज कर दिया।

हिंसा और सुरक्षा हालात
- विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हुए।
- हालात नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की।
- करीब 7,000 सुरक्षाकर्मी और फ्रंटियर फोर्स के जवान प्रांत में तैनात किए गए।
पुलिसकर्मियों की मांगें
पुलिसकर्मियों ने सरकार के सामने 11 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
- वेतन वृद्धि
- जोखिम भत्ता
- आवास सुविधा
- सरकारी योजनाओं का लाभ
अवामी एक्शन कमेटी का बयान
- हमारा अभियान किसी संस्था के खिलाफ नहीं है। लेकिन 70 वर्षों से पीओके के लोगों को मौलिक अधिकार नहीं मिले हैं। अब बहुत हो गया। या तो हमें अधिकार दो या फिर जनता के गुस्से का सामना करो।"
जनजीवन ठप
सोमवार को पीओके में पूर्ण हड़ताल रही।
- बाजार, दुकानें और व्यापारिक केंद्र बंद रहे।
- सड़कों और गलियों में सन्नाटा पसरा रहा।
- स्थानीय आबादी ने संयुक्त कार्रवाई समिति को पूरा समर्थन दिया।
इंटरनेट ब्लैकआउट और अंतरराष्ट्रीय अपील
- पीओके में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गईं।
- यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने इसे असहमति को दबाने की चाल बताया।
- यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन, ईयू, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड से हस्तक्षेप कर हिंसा रोकने की अपील की।
दशकों पुराना दमन
पीओके के लोगों ने पाकिस्तान पर दशकों से राजनीतिक दमन और अधिकारों से वंचित रखने का आरोप लगाया है। अब जारी विरोध इन्हीं आरोपों और आर्थिक न्याय की मांग को लेकर तेज होता जा रहा है।
पीओके में उथल-पुथल: पुलिस भी उतरी सड़कों पर, हिंसा में 3 की मौत, 22 घायल
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अचानक बिगड़ गए, जब स्थानीय पुलिसकर्मी भी पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। अब तक हो रहे धरना-प्रदर्शन और हड़ताल को अवामी एक्शन कमेटी आगे बढ़ा रही थी, लेकिन पुलिस की नाराजगी ने आंदोलन को और तेज कर दिया।
हिंसा और सुरक्षा हालात
विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हुए।
हालात नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की।
करीब 7,000 सुरक्षाकर्मी और फ्रंटियर फोर्स के जवान प्रांत में तैनात किए गए।
पुलिसकर्मियों की मांगें
पुलिसकर्मियों ने सरकार के सामने 11 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
वेतन वृद्धि
जोखिम भत्ता
आवास सुविधा
सरकारी योजनाओं का लाभ
अवामी एक्शन कमेटी का बयान
हमारा अभियान किसी संस्था के खिलाफ नहीं है। लेकिन 70 वर्षों से पीओके के लोगों को मौलिक अधिकार नहीं मिले हैं। अब बहुत हो गया। या तो हमें अधिकार दो या फिर जनता के गुस्से का सामना करो।"
जनजीवन ठप
सोमवार को पीओके में पूर्ण हड़ताल रही।
बाजार, दुकानें और व्यापारिक केंद्र बंद रहे।
सड़कों और गलियों में सन्नाटा पसरा रहा।
स्थानीय आबादी ने संयुक्त कार्रवाई समिति को पूरा समर्थन दिया।
इंटरनेट ब्लैकआउट और अंतरराष्ट्रीय अपील
पीओके में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गईं।
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने इसे असहमति को दबाने की चाल बताया।
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन, ईयू, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड से हस्तक्षेप कर हिंसा रोकने की अपील की।
दशकों पुराना दमन
पीओके के लोगों ने पाकिस्तान पर दशकों से राजनीतिक दमन और अधिकारों से वंचित रखने का आरोप लगाया है। अब जारी विरोध इन्हीं आरोपों और आर्थिक न्याय की मांग को लेकर तेज होता जा रहा है।