ट्रंप की नोबेल की चाह; दौड़ से ही हुए बाहर .
ट्रंप की नोबेल की चाह; दौड़ से ही हुए बाहर
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार वैश्विक मंचों पर जोर देकर यह कह चुके हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उनका दावा है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों के बीच युद्ध रुकवाए और इस काम के लिए वे नोबेल के हकदार हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर खुद के लिए नोबेल पुरस्कार की वकालत की।
दौड़ से बाहर क्यों हुए ट्रंप?
हालांकि, ट्रंप इस बार पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए। कारण यह है कि उनके नाम का प्रस्ताव नामांकन की समयसीमा 31 जनवरी के बाद किया गया। कंबोडिया, इजराइल और पाकिस्तान के नेताओं ने उन्हें नामित किया था, लेकिन यह नामांकन बाद में भेजे गए, इसलिए 2025 पुरस्कार के लिए अमान्य हो गए।
नोबेल शांति पुरस्कार समिति
- समिति में नॉर्वेजियन संसद द्वारा नियुक्त 5 सदस्य होते हैं।
- ये सदस्य अक्सर सेवानिवृत्त राजनेता होते हैं, लेकिन हमेशा नहीं।
- वर्तमान समिति का नेतृत्व पीईएन इंटरनेशनल (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाला संगठन) की नॉर्वेजियन शाखा के प्रमुख कर रहे हैं।
- सभी सदस्यों को नॉर्वे की संसद में शक्ति संतुलन के आधार पर नामित किया जाता है।
नामांकन प्रक्रिया
- नामांकन की अंतिम तिथि: 31 जनवरी।
- सरकारों और संसदों के सदस्य, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, राष्ट्राध्यक्ष और पूर्व विजेता नामांकन कर सकते हैं।
- पूरी नामांकन सूची 50 साल तक गोपनीय रहती है।
- हालांकि, कुछ लोग अपना नाम सार्वजनिक कर देते हैं।
- इस साल कुल 338 नामांकन हुए हैं।
मूल्यांकन और चयन
- फरवरी में पहली बैठक तक नाम जोड़े जा सकते हैं।
- इसके बाद नामों की समीक्षा कर शॉर्टलिस्ट बनाई जाती है।
- विशेषज्ञ और स्थायी सलाहकार उम्मीदवारों का मूल्यांकन करते हैं।
- समिति आमतौर पर अगस्त या सितंबर में निर्णय लेती है।
- समिति सहमति से निर्णय चाहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मतदान किया जाता है।
2025 के संभावित दावेदार
इस साल जिनके नाम सार्वजनिक हुए उनमें शामिल हैं:
- अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)
- नाटो
- जेल में बंद हांगकांग कार्यकर्ता चाउ हैंग तुंग
- कनाडाई मानवाधिकार वकील इरविन कोटलर
विशेषज्ञों का मानना है कि समिति इस बार किसी मानवीय संगठन, पत्रकारों या संयुक्त राष्ट्र संस्था को चुन सकती है।
पिछले साल का विजेता
2024 में यह पुरस्कार जापानी परमाणु बम हमलों से बचे लोगों के संगठन "निहोन हिदांक्यो" को दिया गया था। समिति ने इसे परमाणु हथियारों के खतरे से जुड़े काम के लिए चुना।
पुरस्कार और समारोह
- विजेता को स्वर्ण पदक, डिप्लोमा और लगभग 10 करोड़ रुपये (1.19 मिलियन डॉलर) मिलते हैं।
- विजेताओं की घोषणा 10 अक्तूबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे ओस्लो से की जाएगी।
- पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को, अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर, ओस्लो सिटी हॉल में आयोजित होगा।
ट्रंप की नोबेल की चाह; दौड़ से ही हुए बाहर
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार वैश्विक मंचों पर जोर देकर यह कह चुके हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उनका दावा है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों के बीच युद्ध रुकवाए और इस काम के लिए वे नोबेल के हकदार हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर खुद के लिए नोबेल पुरस्कार की वकालत की।
दौड़ से बाहर क्यों हुए ट्रंप?
हालांकि, ट्रंप इस बार पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए। कारण यह है कि उनके नाम का प्रस्ताव नामांकन की समयसीमा 31 जनवरी के बाद किया गया। कंबोडिया, इजराइल और पाकिस्तान के नेताओं ने उन्हें नामित किया था, लेकिन यह नामांकन बाद में भेजे गए, इसलिए 2025 पुरस्कार के लिए अमान्य हो गए।
नोबेल शांति पुरस्कार समिति
समिति में नॉर्वेजियन संसद द्वारा नियुक्त 5 सदस्य होते हैं।
ये सदस्य अक्सर सेवानिवृत्त राजनेता होते हैं, लेकिन हमेशा नहीं।
वर्तमान समिति का नेतृत्व पीईएन इंटरनेशनल (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाला संगठन) की नॉर्वेजियन शाखा के प्रमुख कर रहे हैं।
सभी सदस्यों को नॉर्वे की संसद में शक्ति संतुलन के आधार पर नामित किया जाता है।
नामांकन प्रक्रिया
नामांकन की अंतिम तिथि: 31 जनवरी।
सरकारों और संसदों के सदस्य, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, राष्ट्राध्यक्ष और पूर्व विजेता नामांकन कर सकते हैं।
पूरी नामांकन सूची 50 साल तक गोपनीय रहती है।
हालांकि, कुछ लोग अपना नाम सार्वजनिक कर देते हैं।
इस साल कुल 338 नामांकन हुए हैं।
मूल्यांकन और चयन
फरवरी में पहली बैठक तक नाम जोड़े जा सकते हैं।
इसके बाद नामों की समीक्षा कर शॉर्टलिस्ट बनाई जाती है।
विशेषज्ञ और स्थायी सलाहकार उम्मीदवारों का मूल्यांकन करते हैं।
समिति आमतौर पर अगस्त या सितंबर में निर्णय लेती है।
समिति सहमति से निर्णय चाहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मतदान किया जाता है।
2025 के संभावित दावेदार
इस साल जिनके नाम सार्वजनिक हुए उनमें शामिल हैं:
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)
नाटो
जेल में बंद हांगकांग कार्यकर्ता चाउ हैंग तुंग
कनाडाई मानवाधिकार वकील इरविन कोटलर
विशेषज्ञों का मानना है कि समिति इस बार किसी मानवीय संगठन, पत्रकारों या संयुक्त राष्ट्र संस्था को चुन सकती है।
पिछले साल का विजेता
2024 में यह पुरस्कार जापानी परमाणु बम हमलों से बचे लोगों के संगठन "निहोन हिदांक्यो" को दिया गया था। समिति ने इसे परमाणु हथियारों के खतरे से जुड़े काम के लिए चुना।
पुरस्कार और समारोह
विजेता को स्वर्ण पदक, डिप्लोमा और लगभग 10 करोड़ रुपये (1.19 मिलियन डॉलर) मिलते हैं।
विजेताओं की घोषणा 10 अक्तूबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे ओस्लो से की जाएगी।
पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को, अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर, ओस्लो सिटी हॉल में आयोजित होगा।