कतर में अमेरिकी मिसाइल रडार पर ईरान का हमला: 5000 किमी रेंज वाली चेतावनी प्रणाली को बड़ा नुकसान.
कतर में अमेरिकी मिसाइल रडार पर ईरान का हमला: 5000 किमी रेंज वाली चेतावनी प्रणाली को बड़ा नुकसान
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने ऐसा हमला किया है जिसे अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कतर में तैनात अमेरिका के एक प्रमुख मिसाइल वार्निंग रडार सिस्टम को निशाना बनाया है, जिसकी रेंज करीब 5000 किलोमीटर बताई जा रही है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया था, जिसमें 80 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी।
अमेरिकी मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान
ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा किए गए इस हमले में कतर में तैनात अमेरिकी सेना की मिसाइल चेतावनी प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इस सिस्टम को क्षेत्र में अमेरिका की “आंख” माना जाता था और यह अमेरिकी मिसाइल रक्षा नेटवर्क का एक अहम हिस्सा था।
करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत से बने इस रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की अमेरिका की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से नुकसान की पुष्टि
अंतरिक्ष से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों ने भी अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि की है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी तस्वीरों में AN/FPS-132 (ब्लॉक-5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं।
यह रडार मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़े मिसाइल चेतावनी रडारों में से एक माना जाता है।
ड्रोन हमले की आशंका
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला संभवतः कम लागत वाले हमलावर ड्रोन, संभवतः शाहेद ड्रोन के जरिए किया गया होगा। माना जा रहा है कि मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा।
इस अत्याधुनिक रडार की क्षमता 5000 किलोमीटर तक बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने की है।
कतर में इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम था।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि भले ही अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडारों का वैश्विक नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचना क्षेत्रीय निगरानी के लिए चिंता की बात है।
ऐसे बड़े सिस्टम को तुरंत बदलना या फिर से स्थापित करना आसान नहीं होता। इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है।
यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इसी क्षेत्र में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।