रूस के कामचटका प्रायद्वीप में 7.8 तीव्रता का भीषण भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी
रूस के कामचटका प्रायद्वीप में एक बार फिर धरती कांप उठी है। गुरुवार देर रात यहां रिक्टर स्केल पर 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की क्षेत्र में जमीन से मात्र 10 किलोमीटर गहराई पर था।

भूकंप के तुरंत बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने अलर्ट जारी किया और तटीय इलाकों के निवासियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई। कामचटका के गवर्नर ने बताया कि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की खबर नहीं है, लेकिन बचाव दल पूरी तरह तैयार हैं।
पहले भी आए थे तेज झटके
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब बीते शनिवार को भी इसी इलाके में 7.1 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया था। उसका केंद्र जमीन से 60 किलोमीटर गहराई में था। वहीं, जुलाई में यहां 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसके बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सुनामी का खतरा पैदा हो गया था। शनिवार को फिर यहां 7.4 तीव्रता का झटका भी दर्ज किया गया।
भूकंप-हॉटस्पॉट क्यों है कामचटका?
कामचटका प्रायद्वीप लगभग 1,200 किलोमीटर लंबा है और प्रशांत रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यहां लगातार टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।
- इस क्षेत्र के नीचे प्रशांत प्लेट, उत्तरी अमेरिकी प्लेट और ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट की टकराहट होती है।
- दक्षिणी हिस्से में मौजूद कुरिल-कामचटका ट्रेंच में प्रशांत प्लेट समुद्र तल के नीचे ओखोत्स्क प्लेट में धंसती है, जिसे सबडक्शन जोन कहते हैं।
- यही टकराव और दबाव बड़े भूकंपों का प्रमुख कारण है।
संभावित सुनामी का खतरा
भूवैज्ञानिक मानते हैं कि इस तरह के बड़े भूकंप के बाद सुनामी की लहरें सबसे पहले जापान और कोरिया तक पहुंच सकती हैं। इसके बाद यह अलास्का और हवाई द्वीपों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
कामचटका अपनी भूगर्भीय, जलवायु और समुद्री अस्थिरता के कारण रूस का आपदा-हॉटस्पॉट कहलाता है और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थान लगातार इसकी निगरानी करते रहते हैं।
रूस के कामचटका प्रायद्वीप में 7.8 तीव्रता का भीषण भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी
रूस के कामचटका प्रायद्वीप में एक बार फिर धरती कांप उठी है। गुरुवार देर रात यहां रिक्टर स्केल पर 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की क्षेत्र में जमीन से मात्र 10 किलोमीटर गहराई पर था।
भूकंप के तुरंत बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने अलर्ट जारी किया और तटीय इलाकों के निवासियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई। कामचटका के गवर्नर ने बताया कि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की खबर नहीं है, लेकिन बचाव दल पूरी तरह तैयार हैं।
पहले भी आए थे तेज झटके
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब बीते शनिवार को भी इसी इलाके में 7.1 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया था। उसका केंद्र जमीन से 60 किलोमीटर गहराई में था। वहीं, जुलाई में यहां 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसके बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सुनामी का खतरा पैदा हो गया था। शनिवार को फिर यहां 7.4 तीव्रता का झटका भी दर्ज किया गया।
भूकंप-हॉटस्पॉट क्यों है कामचटका?
कामचटका प्रायद्वीप लगभग 1,200 किलोमीटर लंबा है और प्रशांत रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यहां लगातार टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।
इस क्षेत्र के नीचे प्रशांत प्लेट, उत्तरी अमेरिकी प्लेट और ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट की टकराहट होती है।
दक्षिणी हिस्से में मौजूद कुरिल-कामचटका ट्रेंच में प्रशांत प्लेट समुद्र तल के नीचे ओखोत्स्क प्लेट में धंसती है, जिसे सबडक्शन जोन कहते हैं।
यही टकराव और दबाव बड़े भूकंपों का प्रमुख कारण है।
संभावित सुनामी का खतरा
भूवैज्ञानिक मानते हैं कि इस तरह के बड़े भूकंप के बाद सुनामी की लहरें सबसे पहले जापान और कोरिया तक पहुंच सकती हैं। इसके बाद यह अलास्का और हवाई द्वीपों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
कामचटका अपनी भूगर्भीय, जलवायु और समुद्री अस्थिरता के कारण रूस का आपदा-हॉटस्पॉट कहलाता है और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थान लगातार इसकी निगरानी करते रहते हैं।