फीस तक का दुरुपयोग कर रहा है डेली कॉलेज बोर्ड, अनुशासन हुआ तार-तार, शराब-सिगरेट की शिकायतें बढ़ी, ओल्ड डेलियंस भी चिन्ता में.
इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज का वर्तमान संचालक मंडल यानी डीसी बोर्ड अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है। छात्रों से वसूली जाने वाली मोटी फीस का भी सही इस्तेमाल नहीं होता। संस्था में शराब-सिगरेट का सेवन बढ़ रहा है। पैरेंट्स परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्या यह है कि वे अपनी शिकायत किससे करें।
उल्लेखनीय है कि डेली कॉलेज में लगभग 1650 लड़के-लड़कियां पढ़ रहे हैं। इसका सालाना बजट तकरीबन 95 करोड़ का है। इसमें स्टूडेंट्स से वसूली जाने वाली मोटी राशि भी शामिल है। पेरेंट्स और पूर्व छात्र भी डोनेशन करते हैं। इतनी बड़े बजट का लगातार दुरुपयोग हो रहा है। संस्था में कई ऐसे काम कराए गए हैं, जिनका स्टूडेंट्स के हित से कोई लेना-देना नहीं है।
सिंपल मेजॉरिटी से सारे निर्णय
विडंबना यह कि डीसी बोर्ड किसी भी नियम का पालन नहीं करता। यहां तक कि संस्था के संविधान का पन्ना भी नहीं पलटा जाता। सिंपल मेजॉरिटी से निर्णय पास किए जा सकते है। बोर्ड की किसी को भी कोई जवाबदेही नहीं होती है। कई बार पैरेंट्स ने बोर्ड की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। पैरेंट्स और मेंबर्स के पास कोई उचित प्लेटफॉर्म नहीं है जहां वे बोर्ड से जवाब-तलब कर सके। वे अपने सुझाव किसे दें। संस्था की कोई वार्षिक आम सभा नहीं होती है, जहां सभी संबंधित लोगों को शामिल किया जाए।
संस्था का अनुशासन हुआ तार-तार
संस्था के कई सदस्यों का मानना है कि डीसी बोर्ड की रुचि सिर्फ अपने हित साधने में रहती है, इसलिए संस्था के हित में फैसले नहीं हो पा रहे हैं। किसी जमाने में अनुशासन के लिए प्रसिद्ध इस संस्था में अब अनुशासन तार-तार हो चुका है। परिसर में स्टूडेट्स द्वारा शराब और सिगरेट सेवन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पहले ऐसे मामले पकड़े जाने पर बोर्ड संबंधित स्टूडेंट पर एक्शन लेता था, लेकिन इस बोर्ड की कोई रुचि नहीं है। कभी अनुशासन के मामले सामने आते भी हैं तो बोर्ड उसमें भेदभावपूर्ण फैसले लेता है।
6 हजार ओल्ड डेलियंस भी चिन्ता में
डेली कॉलेज के पूर्व छात्र (ओल्ड डेलियंस) जिनकी संख्या तकरीबन संख्या 6000 देश विदेश में रहते है एवं बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। सभी इस बात से चिंतित है कि स्कूल का स्तर गिर रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान बोर्ड के असंवैधानिक तरीकों से काम कर रहा है। वर्तमान बोर्ड का स्कूल एवं छात्रों के हित में कार्य नहीं करने से स्कूल का नाम, शैक्षणिक भविष्य, नैतिक गुण एवं सर्वांगीण विकास पर गहरा असर पड़ा है।