कमीशन के चक्कर में जहरीला कफ सिरप लिखते थे डॉ.प्रवीण सोनी, कोर्ट में खुद ही किया स्वीकार, जमानत नामंजूर.
भोपाल। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी की जमानत कोर्ट ने नामंजूर कर दी है। डॉ.सोनी कमीशन 10 प्रतिशत कमीशन की लालच में यह कफ सिरप लिखते थे। यह सिरप उनकी पत्नी और भतीजे के दुकान पर ही मिलती थीं। इस तरह सोनी दोगुना मुनाफा कमाते थे।
कोर्ट में अपने बयान में डॉ. प्रवीण सोनी ने खुद ही यह बात स्वीकारी है। डॉ. प्रवीण सोनी के वकील ने परासिया कोर्ट में जमानत याचिका पर तर्क दिया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं, उन्हें तकनीकी आधार पर फंसाया गया है। मिलावट की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की जबकि दवाई की जांच की जिम्मेदारी ड्रग कंट्रोलर विभाग की है। उन्होंने मात्र इलाज के दौरान बच्चों को यह दवा प्रिस्क्राइब की है। इस दवाई की विशेष खेप में कंपनी द्वारा अमानक पदार्थ मिलाया गया है। जिसकी जानकारी डॉ. प्रवीण सोनी को नहीं थी। कोर्ट में सरकारी वकील ने डॉ. प्रवीण सोनी के जमानती आवेदन पर ऐतराज जताया। उन्होंने तर्क दिया- डॉ. सोनी को यह जानकारी थी कि फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाएं 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए, फिर भी उन्होंने यह दवा जारी रखी।
अब तक 23 बच्चों की हो चुकी है मौत
कोल्ड्रिफ वही सिरप है, जिससे मध्य प्रदेश में सितंबर से अब तक 5 साल से कम उम्र के 25 बच्चों की मौत हुई है। सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (की मात्रा तय सीमा से लगभग 500 गुना ज्यादा थी, जिससे बच्चों की जान गई। डॉ. सोनी ने कोर्ट में अपने बयान में कहा कि उन्हें हर बिक्री पर कमीशन मिलता था।
कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना
सरकारी वकील के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने डॉक्टर प्रवीण सोनी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश में कहा कि घटना की जानकारी होने के बावजूद डॉक्टर ने संबंधित सिरप का उपयोग जारी रखा। 18 दिसंबर 2023 की स्वास्थ्य महानिदेशालय की गाइडलाइन के बाद भी 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा देना गंभीर लापरवाही है। अपराध गंभीर प्रकृति का है, जांच अधूरी है और अभियुक्त साक्ष्य प्रभावित कर सकता है।