हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने आयोजित किया Justitia – 2025 ग्रैंड लॉ कॉन्क्लेव, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने दिया मार्गदर्शन.
इंदौर। उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ इंदौर द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऑडिटोरियम में शनिवार को JUSTITIA-2025 THE GRATE CONCLEV का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जितेंद्र कुमार माहेश्वरी एवं सतीश कुमार शर्मा साहब के मुख्य अथित्य में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट एवं मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्तियों ने “Art of court craft, morals end ethics of advocacy” विषय पर अधिवक्ताओं और ज्यूडिशियरी स्टाफ को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय जबलपुर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कृष्ण राव चितले व इंदौर शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत जहां गणेश वंदना से आरंभ हुई तत्पश्चात कार्यक्रम का आरंभ उच्च न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष रितेश ईनाणी के वक्तव्य से शुरू हुआ। मंच का संचालन संघ के सचिव लोकेश मेहता ने किया। संघ के अन्य सदस्य उपाध्यक्ष मृदुल भटनागर, कार्यकारिणी सदस्य प्रतीक जैन, सौरभ आर.के.जैन, उद्धाव श्रीवस्तव, शुभम ललित नरवरे, अनमोल आलोक कुशवाह उपस्थित थे। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ अभिभाषकों का सम्मान किया गया तत्पश्चात आभार संघ के सह-सचिव सागर मुले माना। अंत मे पुलिस बैड द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।
न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने कहा- सत्य की इबादत है वकालत
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत केवल दलीलों की कला नहीं, बल्कि सत्य और नैतिकता की इबादत है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता “Officer of the Court” होते हैं, और उनका पहला दायित्व न्याय व सत्य के प्रति होता है, न कि केवल क्लाइंट की हर कीमत पर जीत। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी वकील का मोरल हर हाल में केवल अपने क्लाइंट को जीत दिलाने का हो, या वह तथ्यों को तोड़े-मरोड़े, तो वह गलत रास्ते पर है। उन्होंने कहा—सत्य सर्वोपरि है। जो खुद को जलाकर दूसरों को रोशनी दे, वही सच्चा वकील है। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि वकील का काम निडर होना चाहिए। मिसालें बहुत हैं अंधेरे में लड़ने की, लेकिन जो खुद उजाला बनकर दूसरों के लिए रोशनी करे, वही सही मायने में वकील है।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा सफलता लिफ्ट से नहीं मिलती
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि यदि वकील विनम्र होता है, तो न्यायाधीश भी संवेदनशील होते हैं। वे पीड़ा को समझते हैं। निगेटिविटी बहुत तेज़ी से फैलती है, जबकि सकारात्मक प्रयासों की चर्चा कम होती है। उन्होंने वकीलों को याद दिलाया कि अधिवक्ता की नैतिक जिम्मेदारी अदालत के भीतर और बाहर—दोनों जगह समान रूप से बनी रहती है। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि यदि किसी केस में दम है, तथ्य मज़बूत हैं और तर्क न्यायसंगत हैं, तो राहत अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि सफलता पाने का कोई शॉर्ट कट नहीं है। सफलता लिफ्ट से नहीं सीढ़ी चढ़कर मिलती है, इसके लिए अपने वरिष्ठ अधिकवताओं के साथ सीखने की जरूरत है।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने कहा- प्रेजेंटेबल दिखें वकील
मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि नए अधिवक्ताओं को नहीं पता कोर्ट में कैसे पेश होना है, डायस कैसे छोडना है , इसलिए उन्हें किसी एडवोकेट का ऑफिस जॉइन करना चाहिए। यूनिफॉर्म बहुत साफ होना चाहिए और स्मार्टली पहनना चाहिए। प्रेजेंटेबल दिखना चाहिए। उन्होने कहा सबमिशन छोटा होना चाहिए न कि विस्तृत।
जस्टिस आनंद पाठक ने मेंटल फिटनेस पर दिया जोर
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (ग्वालियर बेंच) के जस्टिस आनंद पाठक ने अपने संबोधन में ईमानदारी, साहस, निर्भीकता, मेहनत, सत्यनिष्ठा जैसे अधिवक्ताओं के गुण बताए। उन्होने कहा अधिवक्ता समाज के हीलर्स होते हैं। हीलर का गुण है समनुभूति। अगर आपको किसी के कष्ट को उसी के अनुरूप महसूस करना आता है तो आप अच्छे प्रोफेशनल हैं। उन्होंने कहा कि यह पेशा 10 से 14 घंटे मेहनत की मांग करता है जिसके लिए आपको फिजिकल फिटनेस जरूरी है। इसके बाद मेंटल फिटनेस में लॉ बुक्स पढ़ने के अलावा जनरल रीडिंग की भी आदत होनी चाहिए। यदि मेंटल फिटनेस लेना है तो जितना ज्यादा आप पढ़ेंगे, उतनी आपकी लर्निंग बढ़ेगी।
जस्टिस विवेक रुसिया ने कहा-सत्यनिष्ठा वकालत की प्राणवायु
मप्र हाई कोर्ट जबलपुर मुख्य पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा अधूरी तैयारी न केवल वकील को बल्कि न्याय को भी कमजोर करती है। इसलिए पूरी तैयारी के साथ कोर्ट में पेश होना चाहिए। वकालत केवल दलीलों का काम नहीं, क्रॉस एक्जामिनेशन लंबे न हो, पॉइंट टू पॉइंट हों। न्यायालय में आचरण की अधिवक्ता की असली पहचान बनता है। उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा वकालत की प्राण वायु है। क्लाइंट का विश्वास नहीं टूटना चाहिए।