मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जारी, इंदौर-छिंदवाड़ा के बाद अब भोपाल के जेपी अस्पताल में लापरवाही, बिजली गुल होने से ऑपरेशन तक टले.
भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का सिलसिला जारी है। इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के कुतरने से हुई मौतों का मामला अभी थमा भी नहीं था कि छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप ने करीब दो दर्जन बच्चों की जान ले ली। इसके बाद अब शनिवार को राजधानी भोपाल के जेपी अस्पताल में बिजली गुल होने से फैली अव्यवस्था से साफ जाहिर है कि स्वास्थ्य के मामले में लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
शनिवार को जेपी हॉस्पिटल में बिजली व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई। अस्पताल में सुबह करीब एक घंटे से ज्यादा वक्त तक बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद रही, जिससे ओटी, डायलिसिस यूनिट, आईसीयू और अन्य अहम सेवाएं प्रभावित हो गईं। सबसे हैरानी की बात यह रही कि बैकअप के लिए मौजूद जनरेटर भी नहीं चल सका, क्योंकि उसमें डीजल नहीं था। सुबह 9:55 बजे एक मरीज को एनेस्थीसिया देकर ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी। सर्जन द्वारा चीरा लगाए जाने ही वाला था कि बिजली चली गई। तत्कालीन स्थिति में केवल यूपीएस से जुड़े मॉनिटर काम कर रहे थे। कुछ मिनट इंतज़ार करने के बाद डॉक्टरों ने टॉर्च का सहारा लिया। हालांकि, शुक्र रहा कि ऑपरेशन शुरू नहीं हुआ था, इसलिए टीम ने बेहोशी की दवा का प्रभाव धीरे-धीरे कम करने की प्रक्रिया शुरू की और सर्जरी स्थगित कर दी।
डायलिसिस मशीनें बंद होने से परेशान हुए मरीज
बिजली गुल होने से सुबह 8 बजे से चल रही डायलिसिस यूनिट में भी संकट आ गया। बिजली जाते ही करीब 8 मरीजों की डायलिसिस प्रक्रिया बीच में ही रुक गई। डायलिसिस मशीनों में बैकअप मात्र 25 मिनट का था, जबकि प्रक्रिया पूरी होने में एक घंटे से अधिक समय बाकी था। यूनिट प्रभारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रक्रिया रोक दी और रक्त की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।
आखिर जनरेटर में डीजल क्यों नहीं था
जब बिजली बंद हुई तो जनरेटर स्टार्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन पता चला कि उसमें डीजल ही नही हैं। बाद में डीजल मंगवाकर जनरेटर चालू किया गया इस कवायद में करीब सवा 11 बज गए। इस दौरान पूरा अस्पताल ओपीडी, ओटी, आईसीयू, सिविल सर्जन ऑफिस तक बिजली से वंचित रहा। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को उमस और ऑक्सीजन सपोर्ट की अनिश्चितता झेलनी पड़ी।