युद्ध के बीच भी नहीं छोड़ा घर: खामेनेई ने बंकर में जाने से किया इनकार.
युद्ध के बीच भी नहीं छोड़ा घर: खामेनेई ने बंकर में जाने से किया था इनकार
भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान या बंकर में जाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने सहयोगियों और सुरक्षा अधिकारियों की सलाह भी स्वीकार नहीं की।
इलाही ने कहा कि खामेनेई का मानना था कि यदि तेहरान के लगभग 1 करोड़ 90 लाख नागरिकों के लिए सुरक्षित शेल्टर उपलब्ध कराए जाएं, तभी वह भी अपना घर छोड़ने के लिए तैयार होंगे।
इलाही ने खाड़ी देशों में ठिकानों को निशाना बनाए जाने को ईरान की मजबूरी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने यह कदम आत्मरक्षा के तहत उठाया, ताकि अमेरिका समर्थित ठिकानों से हो रहे हमलों को रोका जा सके।
उनके अनुसार ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन अपनी गरिमा और भूमि की रक्षा के लिए वह हर कुर्बानी देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का सवाल ही नहीं उठता और जरूरत पड़ी तो ईरान पांच साल तक युद्ध लड़ने के लिए भी तैयार है।
इलाही ने कहा कि खाड़ी देशों में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ किया जा रहा था। उनका दावा है कि अमेरिका ने ईरान के आसपास 33 से 45 सैन्य अड्डे बना रखे हैं। तेहरान ने पड़ोसी देशों से अनुरोध किया था कि इन अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए न होने दिया जाए, लेकिन हमले जारी रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष बढ़ने के बीच ईरान के अमेरिका के साथ वार्ता के लिए तैयार होने का दावा पूरी तरह गलत है। इलाही ने कहा कि ईरान अपना खून बहाने को तैयार है, लेकिन अपनी जमीन देने को नहीं। उनका कहना था कि फिलहाल ईरान अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता क्योंकि युद्ध की शुरुआत उसी ने की है।
इलाही ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात के कारण ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, जिससे लोगों को गैस, पेट्रोल और तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने माना कि लोगों को इस स्थिति से पीड़ा हो रही है, लेकिन देश की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी हैं। उन्होंने वैश्विक नेताओं से अमेरिका पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाने की अपील भी की।
इलाही ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भारत के साथ गहरे संबंध चाहते थे और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते थे। उन्होंने बताया कि खामेनेई ने अपनी पहली किताब भारत पर लिखी थी, जिससे उनके भारत के प्रति लगाव का पता चलता है। वे भारतीयों की ईमानदारी, वफादारी और बुद्धिमत्ता की सराहना करते थे। ईरान भारत के साथ अपने संबंधों में किसी तरह का टकराव नहीं चाहता और दोनों देशों की दोस्ती आगे भी मजबूत बनाए रखना चाहता है।