पीएम मोदी ने मन की बात में की पहलगाम हमले की चर्चा, कहा-आतंकी और उनके आका चाहते हैं फिर से तबाह हो जाए कश्मीर.
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पहलगाम हमले की चर्चा की। पीएम ने कहा-आतंकी और आतंक के आका चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए और इसलिए इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दिया। आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में देश की एकता, 140 करोड़ भारतीयों की एकजुटता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही थी, लोगों की कमाई बढ़ रही थी, युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो रहे थे। देश के दुश्मनों को, जम्मू-कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। पीएम मोदी ने कहा कि भले वो किसी भी राज्य का हो, वो कोई भी भाषा बोलता हो, लेकिन वो उन लोगों के दर्द को महसूस कर रहा है, जिन्होंने इस हमले में अपने परिजनों को खोया है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई आतंकी वारदात ने देश के हर नागरिक को दुख पहुंचाया है। पीड़ित परिवारों के प्रति हर भारतीय के मन में गहरी संवेदना है।
उन्होंने आगे कहा कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला आतंकवाद को संरक्षण देने वालों की हताशा को दर्शाता है, उनकी कायरता को दर्शाता है. ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी, स्कूल-कॉलेजों में रौनक थी, लोकतंत्र मजबूत हो रहा था, पर्यटन बढ़ रहा था और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे थे, लेकिन जम्मू-कश्मीर और देश के दुश्मनों को यह पसंद नहीं आया। आतंकवादी एक बार फिर कश्मीर को तबाह करना चाहते हैं। इस जघन्य तरीके से किए गए आतंकी हमले की सब ने कठोर निंदा की है। उन्होंने मृतकों के परिवारजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं
पहलगाम के पीड़ितों को मिलेगा न्याय
पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक नेताओं ने मुझे फोन किया, पत्र लिखे, संदेश भेजे. सभी ने इस जघन्य आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में पूरा विश्व 1.4 बिलियन भारतीयों के साथ खड़ा है। एक बार फिर मैं पीड़ित परिवारों को आश्वासन देता हूं कि उन्हें न्याय मिलेगा। इस हमले के साजिशकर्ताओं और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
डॉ. के कस्तूरीरंगन को याद किया
पीएम मोदी ने कहा कि दो दिन पहले हमने देश के महान वैज्ञानिक डॉ० के. कस्तूरीरंगन जी को खो दिया है। विज्ञान, शिक्षा और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई देने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में इसरो को एक नई पहचान मिली। देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने में भी उन्होंने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। डॉ० कस्तूरीरंगन, 21वीं सदी की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक आगे देखने वाली शिक्षा का विचार लेकर आए थे।
म्यांमार के भूकंप पीड़ियों की मदद का जिक्र
पीएम ने कहा कि पिछले महीने म्यांमार में भूकंप से बड़ी तबाही आई, मलबे में फंसे लोगों के लिए भारतीय टीम ने एक फील्ड हॉस्पिटल तैयार किया। इंजीनियरों की एक टीम ने अहम इमारतों को हुए नुकसान का आकलन करने में मदद की। भारतीय टीम ने वहां कंबल, टेंट स्लीपिंग बैग्ल, दवाइयां, खाने-पीने के सामान के साथ ही और भी बहुत सारी चीजों की सप्लाई की। यूथोपिया में रहने वाले भारतीयों ने ऐसे बच्चों को इलाज के लिए भारत भेजने की पहल की है जो जन्म से ही हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे बहुत से बच्चों की भारतीय परिवारों द्वारा आर्थिक मदद भी की जा रही है। कुछ ही दिन पहले भारत ने अफगानिस्तान और इसी हफ्ते नेपाल में दवाईओं और टीके की बड़ी खेप भेजी है। इनसे कई बीमारियों का बेहतर इलाज हो सकेगा।