इंदौर के भागीरथपुरा में कांग्रेस कर रही दिग्विजय सिंह का इंतजार, आखिर ‘वीरू’ की विधानसभा में क्यों नहीं आए ‘जय’, चार नंबर में तो दौड़ पड़े थे.
इंदौर। पूरे देश में इन दिनों इंदौर का भीगारथपुरा चर्चा में है। राजनीति से लेकर मीडिया तक में यहां गंदे पानी से हो रही मौतों की ही बात हो रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तक इस पर टिप्पणी कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से लेकर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा यहां रोज पुलिस-प्रशासन से मोर्चा ले रहे हैं, लेकिन पूर्व मंत्री दिग्वजिय सिंह ने इधर का मुंह नहीं किया।
दो दिन पहले ही जब यहां पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा पहुंचे तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था। इसके बाद भी वे पीड़ितों से मिलने की कोशिश करते रहे। कल यानी मंगलवार को नेता प्रतपिक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी भारी मशक्कत के बाद भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने पुलिस-प्रशासन के रोकने के बाद भी पीड़ितों से मुलाकात की। पूरा विपक्ष इस मामले को भुनाने की कोशिश में है, लेकिन दिग्विजय सिंह ने चुप्पी साध रखी है।
वीरू के कहने पर सीतलामाता बाजार आए थे
भाजपा में ही नहीं कांग्रेस में भी दिग्विजय सिंह और कैलाश विजयवर्गीय की जोड़ी को जय और वीरू के रूप में जाना जाता है। जब सीतलामाता बाजार में जिहादी मानसिकता के लोगों को नौकरी से हटाने का अभियान एकलव्य सिंह गौड़ ने चलाया था, तब दिग्विजय सिंह तुरंत वहां पहुंच गए। भाजपा में चर्चा रही कि विजयवर्गीय के कहने पर ही दिग्विजय वहां गए थे। अब जबकि भागीरथपुरा में हर दिन लोग गंदा पानी पीने से मर रहे हैं, दिग्वजिय का पता ही नहीं, क्योंकि यह विधानसभा विजयवर्गीय की है।
विधानसभा में विजयवर्गीय ने पढ़े थे कसीदे
हाल ही में भाजपा और कांग्रेस के सारे विधायक उस समय दंग रह गए जब विजयवर्गीय विधानसभा में दिग्विजय सिंह के पक्ष में कसीदे पढ़ डाले। विधानसभा में विजयवर्गीय ने कहा था कि वर्ष 1993 से 2003 तक मुख्यमंत्री के रूप में दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में राज्य के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट, बांध सागर परियोजना को गति देना तथा कोलार जल परियोजना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विजयवर्गीय ने कहा था कि इंदौर में आईआईएम की स्थापना के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विशेष प्रयास किए। इसी का परिणाम रहा कि इंदौर में आईआईएम और आईआईटी दोनों संस्थान स्थापित हुए। इंदौर देश का पहला ऐसा शहर है, जहां आईआईएम और आईआईटी दोनों मौजूद हैं, जिसमें अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह तथा तत्कालीन नेतृत्व का बड़ा योगदान रहा।
दिग्विजय को बता दिया था अपना गुरु
विजयवर्गीय ने सदन में यह भी कहा कि राजनीतिक सौजन्यता और मानवीय संवेदनाओं का पाठ उन्होंने दिग्विजय सिंह से सीखा है। उन्होंने एक व्यक्तिगत प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब उनके जबलपुर के कार्यकर्ता ओमकार तिवारी को अचानक स्वास्थ्य संकट आया, तब दिग्विजय सिंह ने तत्काल हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर उन्हें दिल्ली भिजवाया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का यह स्वभाव रहा है कि चाहे समर्थक हो या राजनीतिक विरोधी, यदि कोई सहायता के लिए उनके पास पहुंचे तो वे बिना भेदभाव मदद करते थे।
दिग्विजय के कार्यकाल में फेमस थी जोड़ी
जब दिग्विजय सिंह सीएम थे, तब विजयवर्गीय के साथ उनकी जोड़ी जय-वीरू के रूप में फेमस थी। इसी दौरान विजयवर्गीय इंदौर के महापौर बन गए और फिर क्या था दोनों की जुगलबंदी जम गई। दिग्गी जब भी इंदौर आते, भाजपा में रहते हुए भी दिग्विजय उनके स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ते। उस समय भाजपा में विजयवर्गीय की जादूगरी की चर्चा होती कि किस तरह दिग्गी को वश में कर रखा है। अब अंदर ही अंदर क्या समझौता हुआ था या कौन सी खिचड़ी पकी थी, किसको पता?